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यह जीवन कब, कहां और कैसे बदल जाए………कोई नहीं जानता !

by bnnbharat.com
April 29, 2020
in समाचार
यह जीवन कब, कहां और कैसे बदल जाए………कोई नहीं जानता !

यह जीवन कब, कहां और कैसे बदल जाए.........कोई नहीं जानता !

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नीता शेखर,

गर्मी या ठंडे को हम महसूस कर सकते है. ना हम उसे छू सकते हैं ना देख सकते हैं. ठीक उसी तरह से किसी के चले जाने के बाद हम महसूस करते हैं उस व्यक्ति का हमारे जीवन में क्या मूल्य था.

आज मुझे अपनी सुमन आंटी की बहुत याद आ रही है. अब मैं उनको केवल याद कर सकती हूं. छू नहीं सकते क्योंकि वह हमेशा के लिए परलोक चली गई. मैं आंटी को अपना आदर्श मानती थी.

मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ उनसे सीखा. हर काम में वह निपुण थी. चाहे खाना बनाना हो, चाहे घर की साफ-सफाई, या किसी का आदर सत्कार करना हो. इतने अच्छे से निभाती थी कि पूरा कॉलोनी उनका फैन था. किसी भी व्यक्ति को मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती. आंटी को मुझ से काफी लगाव था. मुझे हमेशा कुछ ना कुछ सिखाती रहती थी, उनके परिवार में शायद ही कोई ऐसा नहीं था जो मुझे नहीं जानता था. बिल्कुल अपनी बेटी की तरह मानते थे. मेरी शादी में ऐसी तैयारी करवाई थी जैसे उनकी बेटी की शादी हो.

उनका सजाया हुआ सामान देखकर मेरे ससुराल में लोग दंग रह गए थे. कोई नहीं जानता यह जीवन कहां, कब, कैसे बदल जाए. ऐसा ही कुछ घटित हो गया आंटी के साथ.

आंटी मेरठ की रहने वाली थी. इसी बीच खबर आई कि भैया, भाभी और छोटे भाई के बच्चे नहीं रहे. मेरठ में पहली बार एसी एक्सपो को लगाया गया था. तभी शॉर्ट सर्किट से आग लग गई. आग से झुलस कर उनके घर के छह सदस्यों की मौत हो गई. इतना गहरा असर पड़ा कि उनका हंसता खेलता जीवन बेकार हो गया. जो आंटी सबको हंसाना सब कुछ करती थी आज खामोश हो गई थी. आज उनके जीवन में सूनापन भर गया था. उसके बाद वह धीरे-धीरे बीमार रहने लगी. उनके शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगी और उन्हें बार-बार ऑक्सीजन लेना पड़ता था. एक हादसे ने उनके जीवन को खोखला कर दिया था. हम सब सोचते आखिर ऐसा क्यों हुआ शायद नियति को यही मंजूर था.

आज सबकी चहेती आंटी बिल्कुल टूट गई थी, कोई किनारा नहीं होता ठीक उसी प्रकार से मनुष्य के जीवन का कोई किनारा नहीं. यह जीवन कब कहां कैसे समंदर की लहरों की तरह रास्ता बदल दे कोई नहीं जानता. समय कब कहां कैसे बदल जाए हम नहीं जानते. आंटी को गए 2 साल हो गए पर आज भी ऐसा लगता है वह हमारे कामों में हमारे आदर्शों में जिंदा है. ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो कम ही दिनों में सब के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ जाते हैं, जो पूरी जिंदगी भूल नहीं सकते.

दोस्तों जिंदगी में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं, जो किसी के लिए आदर्श बन जाते हैं. आंटी के सिखाएं हुए काम संस्कार, आंटी को हम सबके बीच जिंदा रखे हुए है और आंटी हमेशा हम सब के दिलों में रहेंगी.

यह मेरी एक छोटी सी श्रद्धांजलि आंटी के नाम 🙏🙏—————

नीता शेखर

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