नई दिल्ली: गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाल ही में हिंसक झड़प पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल खड़े किए हैं.
ओवैसी ने एक के बाद एक किए गए कई ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. एक ट्वीट में उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक भारत का एक भी हिस्सा चीन के कब्जे में नहीं है. इसलिए मेरे कुछ सवाल हैं-
1. हमारे 20 सैनिक क्यों मारे गए, अगर भारतीय सेना ने चीनी सेना के जवानों को भगाने की कोशिश नहीं की.
2. किसी भी प्रधानमंत्री को हक नहीं है कि वे भारतीय भू-भाग को बिना संसद की मंजूरी के किसी को दान में दे दें.
3. एयर वाइस मार्शल (रिटायर्ड) बहादुर मनमोहन का दावा है कि गलवान इलाका हमेशा से एलएसी के भारतीय साइड की ओर रहा है.
4. चीन के लोग दावा कर रहे हैं कि गलवान घाटी उनकी है. यह कहना कि चीन का कोई कब्जा नहीं है, क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं.
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि अगर भारतीय क्षेत्र में कोई चीनी घुसपैठ नहीं है तो भारतीय वायुसेना को यह क्यों कहना पड़ रहा है कि एलएसी पर किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए हम तैयार हैं.
ओवैसी ने कहा कि यह काफी भ्रमात्मक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान एक-दूसरे के विरोधाभासी हैं. एक कहते हैं कि कोई घुसपैठ नहीं है.दूसरे कहते हैं कि चीन गलवान में एलएसी का सम्मान करते हुए आपसी सहमति से चले गए. चीन ने गलवान सेक्टर में हमारी ओर ढांचा खड़ा करने को कहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए ओवैसी ने कहा कि क्या पेट्रोल पॉइंट 14 गलवान घाटी अब भी चीनी कब्जे में है, जहां हमारे 20 सैनिक मारे गए हैं. पैंगोंग त्सो झील की स्थिति कैसी है. ज्यादातर हिस्सा भारत का है.

