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वन विभाग का असहयोगात्मक एवं उदासीन रवैया, चालू सत्र में उठाऊंगा मामला : लंबोदर

by bnnbharat.com
March 11, 2021
in समाचार
झारखंड व‍िधानसभा का सत्र कल से, पहली बार दिखेंगे ये चेहरे
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ग्राम वन प्रबंधन एवं संरक्षण समिति का वर्षों से नहीं हुआ है पुनर्गठन, समिति से जुड़े लोग विधायक से मिले
रांची. आजसू पार्टी के विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने ग्राम वन प्रबंधन एवं संरक्षण समितियों के प्रति वन विभाग की असहयोगात्मक रवैया एवं उदासीनता को लेकर चालू बजट सत्र में आवाज उठाने की बात कही है. उन्होंने यह बातें उनसे मिलने आयें रामगढ़ एवं बोकारो के ग्राम प्रबंधन एवं संरक्षण समितियों से जुड़े लोगों कहीं है. ग्राम प्रबंधन एवं संरक्षण समितियों द्वारा जंगलों को बचाने का कार्य किया जाता है और इसी का नतीजा है कि संबंधित जिले में जंगलों में भारी संख्या में पेड़ पौधे देखने को मिलते हैं मगर वन विभाग का जो रवैया बना हुआ है. उससे जंगल को हरा-भरा रखने में प्रतिकूल असर पड़ रहा है. समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जगदीश महतो, महासचिव बीएन ओहदार, सचिव मोहम्मद सुलेमान एवं सदस्य गंगाधर महतो एवं शंकर बेदिया ने संयुक्त रुप से गोमिया विधायक को इस बात से अवगत कराया कि ग्राम वन प्रबंधन संरक्षण समिति का प्रति तीन वर्ष पर ग्राम सभा आयोजित कर वन विभाग की देखरेख में पुनर्गठन किये जाने का प्रावधान है, मगर वर्षों से पुनर्गठन नहीं हुआ है और ना ही संयुक्त खाते का संचालन हुआ है. वन विभाग होने वाले विकास कार्यों से भी समितियों को दूर कर दी है. ग्राम वन प्रबंधन समितियों का एक संगठन केंद्रीय सुरक्षा समिति के नाम से गठित है, जो समय -समय पर समितियों के पुनर्गठन कार्य में सहयोग किया करती है, किंतु वन विभाग बराबर इससे सहयोग नहीं लेता है. इसका असर राज्य भर के जंगलों पर पड़ रहा है. जंगल को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है. वन विभाग का जंगल को बचाने के प्रति नकारात्मक रवैया बना हुआ है. आए लोगों ने विधायक को एक ज्ञापन भी सौंपा. इस क्रम में उल्लेखनीय है की अविभाजित बिहार का झारखंड क्षेत्र विशेष रूप से रामगढ़ एवं बोकारो क्षेत्र में वन्य ग्राम में ग्रामीणों के द्वारा स्वैच्छिक रूप से 80 के दशक से ही वन सुरक्षा समितियां बनाकर सुरक्षा की जाती है. 1980 में ही सरकार द्वारा ग्रामीणों एवं वन विभाग के संयुक्त प्रयास से वनों को बचाने के लिए ग्रामों में ग्राम वन प्रबंधन एवं संरक्षण समितियां गठित की गई. झारखंड राज्य गठन के बाद वनोपाज का 90 फीसद ग्रामीणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया किया गया है. ग्राम सभा से चयनित व्यक्ति समिति का अध्यक्ष और वनपाल पदेन सचिव होता है.

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