रांची: पांच सितंबर से ई-ग्रास व्यवस्था के जरिये स्टाम्प की खरीद बिक्री शुरू हो जायेगी. इस व्यवस्था से राज्य में बेरोजगारों का एक और खेप तैयार हो जायेगा. सरकार के इस रवैये से वेंडरों में काफी रोष है. वेंडरों का कहना है कि सरकार ने कमीशन भी घटा दिया है.
जानकारी के मुताबिक कमीशन मैनुअल के आधार पर सरकार ने वेंडरों को छह प्रतिशत कमीशन निर्धारित की है. इसमें न्यायालय शुल्क दो प्रतिशत है. वेडरों को स्टाम्प बेचने की संख्या भी 5000 तय है. कमीशन मैनुअल में वर्ष 1984 के बाद से आज तक बदलाव नहीं किया गया है. सबसे अचंभे वाली बात यह है कि मैनुअल में बदलाव किये बगैर कमीशन घटा दिया गया है जो गलत है.
बताया जाता है कि ई-स्टाम्पिंग जब से शुरू हुई है तब से वेंडरों को 100 रुपये में 65 पैसा मिलता था. वहीं, स्टॉक होल्डर वेंडरों को 1.5 प्रतिशत कमीशन देता था.
पूरे राज्य में 1000 से अधिक वेंडर होंगे प्रभावित:
पांच सितंबर से शुरू होने वाली नयी व्यवस्था के कारण राज्य के 1000 से अधिक वेंडर प्रभावित हो जायेंगे. इनके परिवार के भरण-पोषण पर भी आफत हो जायेगी. कम पूंजी वालों की मुसिबत बढ़ जायेगी.
अन्य राज्यों में कमीशन दो से छह प्रतिशत है:
झारखंड के अलावा अन्य राज्यों की बात करें तो बिहार में वेंडरों को छह प्रतिशत कमीशन मिलता है. वहीं ओडि़शा में वेंडरों को दो प्रतिशत कमीशन मिलता है लेकिन, वहां स्टाम्प की बिक्री कोई निर्धारित नहीं है. एक वेंडर जितना भी स्टाम्प बेचे उसमें सरकार की कोई दखलंदाजी नहीं है.

