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त्याग से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं

by bnnbharat.com
June 4, 2020
in समाचार
त्याग से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं

त्याग से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं

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नीता शेखर,

कहते हैं आदमी के पास कुछ हो ना हो त्याग की भावना जरूर होनी चाहिए. त्याग से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं.” कहते हैं जिंदगी ना मिलेगी दोबारा. यह बात भी सही है”! कल किसने देखा है आत्मा जब एक शरीर को छोड़कर जाती है तब किसने देखा है वह कहां गई ,गई या नहीं गई आपको जो जिंदगी मिली है उसमें ही कुछ ऐसा कर गुजरो कि इसी जिंदगी में तुम्हारा नाम लेते ही सब दुआ दे.

एक बार मुझे क्लब की तरफ से अनाथ आश्रम जाने का मौका मिला. वहां पर 1 महीने से लेकर 18 साल उम्र के बच्चे थे. उन बच्चों को देखकर ऐसा लगा मानो इस संसार में कितने दुख है, आखिर क्यों हो जाते हैं बच्चे अनाथ? उनका क्या कसूर रहता है? गलती तो उनके मां-बाप करते हैं लेकिन सजा मिलती है उन बच्चों को, इतने मासूम बच्चे इतने प्यारे बच्चे की देख कर मन भावविभोर हो उठा, काश में इनके लिए कुछ कर पाती पर हम समाज के इस बंधन में इस तरह बन जाते हैं कि चाह कर भी सभी बच्चों को खुशी नहीं दे सकते! उन सभी बच्चों में मैंने देखा एक बच्चा सबसे अलग-थलग अपनी किताब लिए पढ़ाई कर रहा था.

पढ़ाई करने वाले बच्चे बहुत अच्छे लगते हैं क्योंकि पढ़ाई एक ऐसी चीज है आप उसे में जितना उलझोगे उतना ही आपका दिमाग सुलझता जाता है.

सबसे बड़ी बात है कि दुनिया में आपके साथ कुछ नहीं जाता. विद्या ही आपके साथ जाती है. खैर मैं अपने आप को रोक न सकी और उस बच्चे के पास गई, मुझे देखते ही बच्चा कुछ घबराया. मैंने उससे बात करते हुए पूछा देखो सबसे पहले घबराओ नहीं पहले हमें तुम अपना नाम बताओ, तुम यहां कैसे आए, क्योंकि आदमी के मन में सबसे पहले जिज्ञासा यही आती है.

मन जानने को उत्सुक हो जाता है इसके बारे में पता करें, उस बच्चे ने बताया वह अभी एक हफ्ता ही पहले आया है. वह काशी का रहने वाला था. अच्छे परिवार से ताल्लुक रखता था. पढ़ने में भी काफी तेज था. उसे पढ़ाई करना बहुत अच्छा लगता था. अपने मां-बाप का इकलौता बच्चा था. एक दिन उसके मम्मी पापा कार से कहीं जा रहे थे कि रास्ते में एक ट्रक तेजी से आई और उनकी गाड़ी को कुचलते हुए चली गई. वहीं पर उनकी मृत्यु हो गई. उस समय वह बच्चा क्लास पांचवी में पढ़ता था, उसे समझ नहीं आ रहा था कुछ भी.

फिर उसके चाचा जी जो रांची में नौकरी करते थे तो अपने पास ले आए. कुछ दिनों तक तो ठीक रहा फिर आए दिन किचकिच करने लगी उसकी चाची. सारे काम उससे करवाने लगी. उन्हें धन का खजाना मिल गया था. 1 दिन चाची ने उसके ऊपर चोरी का इल्जाम लगा कर घर से निकाल दिया, और चाचा जी जब ऑफिस से आए तो उसे बाहर देख कर अंदर ले गए पर आज उसकी चाची ने ठान ली थी कि उसे यहां से हटा देना है. चाचा जी ने काफी कोशिश की मगर वह मानने को तैयार नहीं हुई. उसके चाचा जी ने उसे यहां छोड़ दिया.

उसकी बातें सुनकर मेरा मन बहुत ही दुखी हो गया कि दुनिया में ऐसे भी लोग होते हैं जो बच्चे की संपत्ति को तो ले लेते हैं पर फिर उसे अनाथ आश्रम भेज देते हैं. मेरा मन बार-बार कचोट रहा था काश में कुछ मदद कर पाती.

मैंने वहां के मैनेजर से बात की. उन्होंने कहा कि आप चाहे तो पढ़ा सकते हैं. आपका नाम पता उसे मालूम नहीं होगा. बस आप छुपे माता पिता के नाम से उस को आगे बढ़ा सकते हैं.

उसी समय मैंने ठान लिया कि मैं उसकी मदद करूंगी. फिर मैंने बात करके उसकी शिक्षा पूरी करने की जिम्मेवारी ले ली. उसका एक अच्छे से स्कूल में नाम लिखवा दिया. देखते ही देखते समय कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला. अचानक एक दिन मैनेजर ने बताया कि वह लड़का बैंक मैनेजर हो गया है. उसकी पोस्टिंग हैदराबाद में हो गई है. यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. ऐसा लग रहा था मानो मेरा जीवन सफल हो गया.

ऐसे ही जो सक्षम हो एक भी बच्चे को अपना ले तो उनका जीवन बन जाएगा, पर उसके लिए आपको अपने आप से मन को मजबूत करना होगा ताकि कितनी भी बाधा आए उसके पढ़ाई पर असर ना हो.

आप किसी पर ऐसा परोपकार करके तो देखिए आपका जीवन सफल हो जाएगा. इस धरती पर जन्म लेने का एहसान भी पूरा हो जाएगा. आप एक बार किसी को खुशियां देकर तो देखिए आपका जीवन खुद ही खुशियों से भर जाएगा.

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