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अब ‘कोरोना’ का पता लगाना होगा आसान, पेशाब सूंघकर ट्रेंड कुत्ते बताएंगे रिपोर्ट

by bnnbharat.com
April 17, 2021
in समाचार
अब ‘कोरोना’ का पता लगाना होगा आसान, पेशाब सूंघकर ट्रेंड कुत्ते बताएंगे रिपोर्ट
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BNN DESK: कोविड-19 की पहचान अभी तक एंटीजन और RT-PCR टेस्ट से ज्यादातर हो रही है, लेकिन वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उन्होंने कुछ कुत्तों को ट्रेनिंग दी है. जो लोगों के पेशाब सूंघकर पता लगाएगा कि कोरोना संक्रमण है या नहीं. इसकी सटीकता भी 96 फीसदी तक होगी. ऐसे में कोरोना का पता लगाने के लिए नाक और मुंह में स्वैब टेस्ट किट की स्टिक की जरूरत नहीं होगी.

यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया स्कूल ऑफ वेटरीनरी मेडिसिन वर्किंग डॉग सेंटर की निदेशक सिंथिया ओट्टो ने बताया कि अभी कुत्तों के जरिए टेस्ट कराने की विधि का प्रैक्टिकली लागू करना मुश्किल है. क्योंकि इस पर जीवों के लिए काम करने वाले संस्थान आवाज उठाने लगेंगे. लेकिन कुत्तों की खासियत ये होती है कि वो पेशाब सूंघकर बता देगा कि पॉजिटिव है या निगेटिव है.

सिंथिया ओट्टो ने कहा कि कुत्ते अलग-अलग तरह की खुशबू पहचानते हैं. ये अलग-अलग बीमारियों से संबंधित गंध पहचानते हैं. कोरोना वायरस की गंध तो थूक और पसीने के सैंपल में भी आती है. जिसे कुत्ते आसानी से पहचान लेते हैं. दुबई एयरपोर्ट पर तो कोरोना संक्रमित लोगों की पहचान के लिए स्निफिंग डॉग्स तैनात किए गए हैं.

सिंथिया ने कहा कि अभी तक किसी इंसान के पेशाब को सूंघ कर कुत्ता उसके संक्रमण की जानकारी दे, ऐसा हुआ नहीं था. इसलिए हमारी टीम ने पहले आठ लेब्राडोर रिट्रीवर और एक बेल्जियन मैलिनॉय को प्रशिक्षित किया गया. इसमें उन्हें यूनिवर्सल डिटेक्शन कंपाउंड (UDC) सुंघाया गया. इसकी गंध प्राकृतिक तौर पर कहीं नहीं मिलती. इसकी गंध 12 अलग-अलग गंधों से मिलकर बनती है. इसलिए जब भी कहीं से UDC या उससे संबंधित कोई भी वस्तु गुजरती है तो कुत्ते तुरंत पहचान लेते हैं.

जैसे ही कुत्ते UDC की गंध को पहचानने लगे तब हमने कुत्तों को इंसान के पेशाब की अलग-अलग गंध को पहचानने के लिए ट्रेन्ड करने लगे. सात अलग-अलग कोरोना संक्रमित इंसानों के पेशाब के सैंपल से इन्हें प्रशिक्षित किया गया. इन सात लोगों में दो वयस्क और पांच बच्चे शामिल थे. इसके अलावा छह निगेटिव बच्चों को भी शामिल किया गया था.

दो अलग-अलग जगहों पर एक तरफ संक्रमित पेशाब का नमूना रखा गया. दूसरी तरफ निगेटिव का नमूना. पहला उन्हें अपनी तरफ खींचता है तो दूसरा सैंपल उनका ध्यान भटकाता है. इस पेशाब के सैंपल्स को वायरस मुक्त करने के लिए गर्म किया जाता है. या फिर डिटरजेंट मिलाकर निष्क्रिय किया जा सकता है. ताकि कुत्तों को कोई संक्रमण न हो.

शोधकर्ताओं ने देखा कि तीन हफ्तों की ट्रेनिंग के बाद कुत्ते 96 फीसदी औसत सटीकता के साथ पेशाब के नमूनों से कोरोना पॉजिटिव को पहचानने लगे थे. अधिकतम सटीकता 99 फीसदी थी. जो लोग निगेटिव थे उनमें से कुछ लोग भी हल्के रूप से संक्रमित थे. कुत्तों ने उन्हें भी पहचान लिया. जबकि निगेटिव लोगों की जांच में पहले कोरोना के लक्षण नहीं दिखे थे.

सिंथिया ने कहा कि ये अच्छा तो नहीं लगता कि कुत्तों से कोरोना संक्रमित इंसानों के पेशाब की सुंघाकर जांच कराई जाए. लेकिन भविष्य में ये तरीका भी अपनाया जा सकता है. क्योंकि ये दूर से ही संक्रमित व्यक्ति के पेशाब को सूंघकर सही सूचना दे देंगे. लेकिन इसमें एक ही दिक्कत आ सकती है, क्योंकि हर इंसान के शरीर से अलग तरह की गंध निकलती है. इसिलए पेशाब सूंघते समय इन्हें अलग-अलग गंधों में से किसी एक को चुनना कठिन होगा. क्योंकि प्रशिक्षण के दौरान भी यह समस्या आई थी.

इसके बाद दिक्कत ये आई कि जब आप एक ही सैंपल को कई बार सुंघाते हैं तो कुत्ते भविष्य में सभी सैंपल्स को एक जैसा समझने लगते हैं. इसलिए हो सकता है कि भविष्य में कुत्तों को इस तरह से बीमारियों को सूंघकर बताने की क्षमता विकसित की जा सके. इसलिए अब साइंटिस्ट एक नई स्टडी कर रहे हैं. जिसका नाम है T-Shirt Study.

T-Shirt Study में कुत्ते दो चीन पहचानेंगे. पहला कि कोई कोरोना संक्रमित है या नहीं उसकी गंध से पहचानना और दूसरा उन लोगों की शर्ट को सूंघकर पहचानना जो वैक्सीन लगवा चुके हैं. क्योंकि कुछ लोग वैक्सीनेशन के बाद अगले कुछ घंटों तक वहीं शर्ट पहने रहते हैं. धुलने के बाद भी वैक्सीन की गंध शर्ट से आसानी से नहीं जाती. क्योंकि ये इतनी हल्की होती है कि इसे सिर्फ कुत्ते ही पहचान सकते हैं.

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