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ईपास मॉड्यूल 24 अगस्त 2020 से उपलब्ध होगा
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मैनुअल भौतिक पास 31 अक्टूबर 2020 तक जारी किए जाएंगे
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पास व पीटीओ 1 नवंबर 2020 से डिजिटल रूप में जारी किया जाएगा
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पास व पीटीओ के लिए अब नहीं लगाने होंगे विभागों के चक्कर
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कागजी पास व पीटीओ का दुरुपयोग होगा बंद
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ऐप में रजिस्टर करने के बाद ही रेल कर्मचारी ईपास व पीटीओ प्राप्त कर सकेंगे
तनु कुमार,
मुंगेर: रेलवे बोर्ड द्वारा अब ऑनलाइन पास जेनरेशन और रेलवे कर्मचारियों के टिकट बुकिंग के लिए ही पास मॉड्यूल जारी कर दिया गया है.सेंट्रल फॉर रेलवे इनफॉरमेशन सिस्टम(क्रिस) के द्वारा ई-पास व पिटीओ के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम(एचआरएमएस) मोबाइल ऐप विकसित किया गया है. इसके तहत अब रेलवे अधिकारियों और कर्मचारि कहीं से भी ईपास व पीटीओ के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और ऑनलाइन इसे प्राप्त कर सकते हैं.
कैसे करेगा काम यह ऐप-क्रिस द्वारा विकसित एचआरएमएस मोबाइल ऐप पहले प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा डाउनलोड करने के बाद रेल कर्मचारी पहले IPAS या PF NUMBER ऐप में डालकर अपने को पंजीकृत करेंगे. उसके बाद उनका विवरण दिखाई देगा और उसे भरना होगा उसके बाद मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी(वन टाइम पासवर्ड) भेजा जाएगा जिसके साथ पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी
कैसे करें ऐप से आवेदन-ई पास के लिए मोबाइल में पंजीकृत होने के बाद ऐप में ही टैब पर जाकर पास सेट लिस्ट ट्रैक पर जाना होगा जहां सुविधा पास चुनकर गो बटन पर क्लिक करना होगा,जिसके बाद यदि कोई पिछला मौजूदा आवेदन चालू वर्ष के लिए दिखाई देता है तो उसे संपादित अथवा संशोधित अथवा नया एप्लीकेशन पर क्लिक करना होगा,जहां यात्रा विवरण और परिवार के सदस्यों को पास में शामिल करने का विकल्प चुना होगा इन सभी विवरणों को सेव ड्राफ्ट पर क्लिक कर सबमिट कर देना होगा जिसके बाद रेल कर्मचारी के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ई पास का एसएमएस के माध्यम से पास व पीटीओ से संबंधित एक पासवर्ड दिया जाएगा जिससे रेल कर्मचारी रेलवे के टिकट रिजर्वेशन काउंटर पर दिखाकर रिजर्वेशन टिकट प्राप्त कर सकते हैैं. इसके अलावा आईआरसीटीसी साइट पर भी ऑनलाइन रिजर्वेशन करा सकते हैं.
ईपास मॉड्यूल सिस्टम लागू होने से रेलवे का बढ़ेगा राजस्व- पहले रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों को एक साल में छह और सेवानिवृत्त होने पर तीन रेल पास मिलते हैं. जिसकी वैधता 4 माह की होती थी इस पास के जरिए वह एवं उनके आश्रित मुफ्त रेल सफर करते हैं. गैर राजपत्रित कर्मचारियों को साल में तीन व सेवानिवृत्त होने पर दो पास दिए जाते हैं. अधिकांश रेलकर्मी नजदीकी यात्रा के लिए पास रिजर्वेशन नहीं करते थे जिससे एक पास पर कई बार यात्रा कर ली जाती थी जबकि यह पास आरक्षित टिकट के साथ ही मान्य होते थी.वही रेल कर्मियों को चार पीटीओ यानि प्रिविलेज टिकट ऑर्डर भी मिलता है. पीटीओ से सफर करने के लिए उन्हें एक तिहाई किराया देना पड़ता है. हुआ ही अब ईपास/पीटीओ के लागू होने से अब पास एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकेगा.
अब रेलवे पास व पीटीओ के लिए कर्मचारियों को नहीं लगाने होंगे विभागों के चक्कर-पहले कर्मचारियों को रेल पास व पीटीओ की सुविधा के लिए विभाग के चक्कर काटने पड़ते थे. कागजी प्रक्रिया के दौरान रेल पास व पीटीओ की सुविधा का दुरुपयोग होने का अंदेशा भी बना रहता था, लेकिन अब पूरा डाटा ऑनलाइन अपडेट रहेगा. सिस्टम ई-पास से जुड़ी तमाम जानकारी चंद सेकेंड में ही अधिकारियों व कर्मचारियों को दे देगा. यह सुविधा मिलने के बाद कर्मचारियों को पास लेकर टिकट काउंटर पर जाने और यात्रा के दौरान इसे संभालकर रखने की जरूरत नहीं होगी. अब सिर्फ मोबाइल पर आए कोड को सहेज कर रखना होगा. यही कोड सीट रिजर्व कराते समय फॉर्म में भरना होगा.इससे पहले रेल कर्मचारियों को रिजर्वेशन के लिए कार्मिक विभाग के पास सेक्शन से जारी पेपर वाले पास के सहारे पेपर टिकट लेना पड़ता था. लेकिन ई-पास की सुविधा लागू होने से पूरी व्यवस्था पेपरलेस हो गई है. अब रेल अधिकारी व कर्मचारी भी आम लोगों की तरह घर पर टिकट की बुकिंग करा सकेंगे. इससे पारदर्शिता भी आएगी.
पास के रंग पर नहीं दिखा सकेंगे रौब-भारतीय रेल ने अपने कर्मचारियों को उनकी पोस्ट के आधार पर वर्गीकृत करते हुए उनको मिलने वाले पास के रंगों से उनके ओहदे की पहचान दी है. वरिष्ठ अधिकारियों को सफेद यात्रा पास मिलता है. उनके निचले कर्मियों को हरा पास दिया जाता है. ऐसे ही फिर पीला और गुलाबी पास जारी किया जाता है, जिनका दर्जा ट्रेन में भी इसी आधार पर निर्धारित होता है. अमूमन देखने में आता है कि पहले दो रंग के पास धारकों की शारीरिक भाषा उनके दर्ज के अनुसार दिखाई पड़ती है, लेकिन अब ई-पास के वजूद में आने से पास के रंग पर किसी कर्मी के ओहदे का आकलन नहीं होगा.

