रांची:जाति प्रमाण पत्र को लेकर विवादों में रहे गिरिडीह नगर निगम के मेयर सुनील कुमार पासवान के निर्वाचन की वैधता तय करने के लिए नगर विकास विभाग में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है नगर विकास विभाग ने गिरिडीह के उपायुक्त से पासवान के निर्वाचन और जाति प्रमाण पत्र संबंधी दस्तावेजों की मांग की है दस्तावेज मिलने के बाद नगर विकास विभाग और उनके फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर निर्वाचित होने के मामले की नए सिरे से सुनवाई करेगा 22 जुलाई को हुए कैबिनेट की बैठक में नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन संबंधी मामलों की सुनवाई का अधिकार नगर विकास विभाग को दे दिया गया हैगिरिडीह नगर निकाय का चुनाव 2018 में हुआ था उसने भाजपा समर्थित सुनील कुमार पासवान द्वारा सौंपी गई जाति प्रमाण पत्र पर विवाद खड़ा हुआ जाति को लेकर उठने वाले विवादों के अंतिम हल के लिए बनी राज्य जाती छानबीन समिति की रिपोर्ट के अंतिम निर्णय के तहत सुनील कुमार पासवान को निर्गत जाति प्रमाण पत्र को गिरिडीह के अंचला अधिकारी द्वारा 17 अगस्त 2019 को रद्द कर दिया गया था उसमें तर्क दिया गया कि पासवान मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं 26 जनवरी 1950 से पूर्व झारखंड में रहने का उन्होंने कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया जिस आधार पर उनका झारखंड में एससी होने का जाति प्रमाण पत्र अवैध है इसके बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ने के आरोप में उनके निर्वाचन को चुनौती दी गईपासवान भाजपा समर्थित मेलों में शामिल है जब तक राज्य में भाजपा की सरकार रही मामला लंबा खींचता गया राज्य निर्वाचन आयोग ने भी जाति प्रमाण पत्र फर्जी मरने के बाद भी अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार को ही अधिकृत कर दिया अब नई सरकार आने के बाद स्थिति और परिस्थिति दोनों पर लिख राज्य सरकार ने अब निर्वाचन संबंधी मामलों में सुनवाई और फैसले का अधिकार पूरी तरह से नगर विकास विभाग को दे दिया है इससे अब पासवान का निर्वाचन रद्द होने का खतरा बढ़ गया है

