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NSS ने डॉ राजेंद्र प्रसाद को याद किया, संगोष्ठी का हुआ आयोजन

by bnnbharat.com
December 3, 2020
in समाचार
NSS ने डॉ राजेंद्र प्रसाद को याद किया, संगोष्ठी का हुआ आयोजन
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रांची: रांची विमेंस कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई एक (प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. कुमारी उर्वशी) ,दो (प्रोग्राम ऑफिसर डॉ गीता सिंह)और तीन (प्रोग्राम ऑफिसर डॉ सुरभि श्रीवास्तव) के सामूहिक तत्वाधान में आज डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

संगोष्ठी की अध्यक्षता राजनीति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सुष्मिता कुंडू ने किया. डॉ राजेंद्र प्रसाद की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए शिक्षिकाओं ने कहा कि देश के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में डॉ राजेंद्र प्रसाद एक अनुकरणीय व्यक्तित्व हैं. बचपन में उनके प्रारंभिक पारंपरिक शिक्षण के बाद वे छपरा और फिर पटना चले गए. वहां पढ़ाई के दौरान कानून में मास्टर की डिग्री के साथ डाक्टरेट की विशिष्टता भी हासिल की.

शिक्षिकाओं ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद कानून की पढ़ाई के साथ-साथ वे राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए. वे उन भारतीय नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. महात्मा गांधी ने उन्हें अपने सहयोगी के रूप में चुना था और साबरमती आश्रम की तर्ज पर सदाकत आश्रम की एक नई प्रयोगशाला का दायित्व भी सौंपा था.

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद चाहे धर्म हो, वेदांत हो, साहित्य हो या संस्कृति, शिक्षा हो या इतिहास, राजनीति, भाषा, वे हर स्तर पर अपने विचार व्यक्त करते थे. उनकी स्वाभाविक सरलता के कारण वे अपने ज्ञान-वैभव का प्रभाव कभी प्रतिष्ठित नहीं करते थे. ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ के अपने सिद्धांत को अपनाने वाले डॉ. राजेंद्र प्रसाद अपनी वाणी में हमेशा ही अमृत बनाए रखते थे.

आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के साथ ही राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने. वर्ष 1957 में वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गए. इस तरह वे भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति पद प्राप्त किया था. उन्हें सन् 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नवाजा गया. बाद में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और अपना शेष जीवन पटना के निकट एक आश्रम में बिताया, जहां 28 फरवरी, 1963 को बीमारी के कारण उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली.

संगोष्ठी में विषय प्रवेश डॉ कुमारी उर्वशी द्वारा कराया गया .डॉ गीता सिंह  ने डॉ राजेंद्र प्रसाद के दार्शनिक पक्ष पर विचार प्रस्तुत किया. कार्यक्रम की समाप्ति पर डॉ सुरभि श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम में स्नातकोत्तर इतिहास की छात्रा अंजली मिश्रा ,स्नातकोत्तर हिंदी की छात्रा दिव्या कुमारी, तथा प्रियंका कुमारी दर्शनशास्त्र की छात्रा ने डॉ राजेंद्र प्रसाद के व्यक्तित्व और विचारों पर अपने विचार प्रस्तुत किए. संगोष्ठी में लगभग 50 छात्राएं शामिल हुई. यह जानकारी कॉलेज की प्रेस इंचार्ज डॉ कुमारी उर्वशी ने दी.

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