रांची: आज से जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों में पुस्तक विक्रेताओं को स्टॉल लगाने की अनुमति दी है. विदित हो कि NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह बहुत दिनों से निजी स्कूलों के मनमानी को लेकर आवाज उठाते आये है. इंदरजीत सिंह ने ट्विटर के माध्यम से जिला प्रशासन से पूछा है कि क्या निजी स्कूलों में लगने वाले पुस्तक विक्रेता स्कूल के स्टूडेंट को 10 से 15 % की छूट देंगे क्योंकि बाहर से किताबे लेने पर 10- 15% की छूट मिलती थी.
इंदरजीत सिंह ने कहा कि निजी स्कूलों में लगने वाले स्टॉल किसी भी पेरेंट्स को जबरदस्ती बुक कॉपी खरीदने के लिए बाध्य नही करंगे. जबरदस्ती स्टेशनरी आइटम्स को लिस्ट में शामिल नही करंगे. जो बुक्स की जरूरत है, उन्हें ही शामिल करें. साइड बुक्स या एडिशनल चीजें शामिल ना करें. सभी स्कूलों में कोरोना को देखते हुए पूरी व्यवस्था, सुविधा होनी चाहिए. अगर किसी भी स्कूल से कोई शिकायत आती है कि पुस्तक विक्रेता अभिवावकों पे किसी भी प्रकार का दबाव डाल रहे या ज्यादा पैसा ले रहे तो NSUI तुरंत उस स्कूल पर एक्शन लेगी एवं शिक्षा मंत्री से उस स्कूल की मान्यता को रद्द करने की मांग करेगी. हेल्पलाइन नंबर 9534123308
आखिर किस आधार पर जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों को अनुमति दी
प्रदेश उपाध्यक्ष इंदरजीत सिंह ने कहा कि कोरोना के चलते पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है. झारखंड के रांची को रेड जोन में डाला गया है. इस महामारी में क्या निजी स्कूलों को अभी भी कमाई की सूझी हुई है. इस लॉक डाउन अवधि में छात्रों और अभिवावकों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे. जब स्कूल वाले बोलते है कि ऑनलाइन पढ़ाई हो ही रही तो किताबे खरीदवाने की क्या हड़बड़ी है. आखिर सबकी जान जोखिम में क्यों डाला जा रहा. क्या स्कूल प्रशासन सभी के स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेवारी लेगी. जिला प्रशासन से आग्रह है की अविलंब सभी स्कूलों की अनुमति रद्द करें और लॉक डाउन के बाद सब कुछ सही होने पर ही स्टॉल लगाने की अनुमति दे.

