रांची: झारखंड समेत देशभर में महिला सशक्तिकरण सभी दलों का प्रमुख मुद्दा है लेकिन विधायिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी नाकाफी है. झारखंड गठन के बाद से अबतक सिर्फ 21 महिलाएं ही विधानसभा पहुंची हैं. वर्तमान विधानसभा में विभिन्न दलों की 10 महिलाएं विधायक हैं जबकि राज्य में महिला वोटरों की संख्या एक करोड़ से अधिक है.
अलग राज्य गठन के बाद से विधानसभा के तीन चुनाव हुए हैं. वर्ष 2005 में हुए चुनाव में सिर्फ तीन महिलाएं ही जीत कर विधानसभा पहुंच पायी थी. इसमें लिट्टीपाड़ा से सुशीला हांसदा, कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी व निरसा से अर्पणा सेनगुप्ता शामिल थी. हालांकि इस चुनाव में 94 महिलाएं उतरी थी. इसमें से 85 महिलाओं की जमानत जब्त हो गयी थी.
2009 में आठ महिलाओं ने दी थी दस्तक
वर्ष 2009 में आठ महिलाएं चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंची थी. इसमें कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी, जामा से सीता सोरेन, झरिया से कुंती देवी, पोटका से मेनका सरदार, जगन्नाथपुर से गीता कोड़ा, सिसई से गीताश्री उरांव, सिमडेगा से विमला प्रधान और छत्तरपुर से सुधा चौधरी शामिल थी. इस चुनाव में 107 महिलाओं ने भाग्य अजमाया था. इसमें से 94 महिलाओं की जमानत जब्त हो गयी थी.
2014 में 10 महिलाओं ने हासिल की थी जीत
साल 2014 में हुए चुनाव में 10 महिलाएं राज्य की सर्वोच्च पंचायत तक पहुंची. इसमें दुमका से लुईंस मरांडी, जामा से सीता सोरेन, कोडरमा से नीरा यादव, बड़कागांव से निर्मला देवी, पोटका से मेनका सरदार, जगन्नाथपुर से गीता कोड़ा, मांडर से गंगोत्री कुजूर व सिमडेगा से विमला प्रधान व मनोहरपुर से जोबा मांझी शामिल थीं. लुईस मरांडी और नीरा यादव को रघुवर सरकार में मंत्री का पद भी मिला. बाद में विभिन्न कारणों से राज्य में हुए उपचुनाव में सिल्ली से सीमा देवी व गोमिया से बबीता देवी ने जीत दर्ज कर विधानसभा का रुख किया.

