रांची: आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने संवैधानिक पद पर बैठे लोगों से नियमानुकूल और कानून सम्मत व्यवहार करने की अपेक्षा जताई है.
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन में कानून का उल्लंघन किया गया वह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. जिस प्रकार से संसदीय कार्य एवं ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम द्वारा दबाव डालकर कई बसों में लोगों को अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया, वह पूरी तरह से गलत और निंदनीय है.
जब एक तरफ सरकार कह रही है कि जो जहां है वहीं रहे. सभी उपाय किए गए हैं और किए जा रहे हैं तो फिर सरकार के मंत्री द्वारा इस तरह के कृत्य किए जाने से यह स्पष्ट होता है कि सरकार की कही गई बात में ही विरोधाभास है और कथनी व करनी में अंतर नजर आ रहा है.
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अब जब कोरोना संक्रमण की पुष्टि झारखंड में हो गई है तो उस परिपेक्ष्य में कानून का पालन कड़ाई से किया जाना चाहिए. ताकि अन्य लोगों में करोना का संक्रमण नहीं फैल सके. डॉ. लंबोदर महतो ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में फंसे झारखंड के लोगों की स्थिति ठीक नहीं है. ऐसे लोग सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर रहे हैं तो वह व्यस्त- व्यस्त बताता है और फोन करने वाले का दिन इसी में गुजर जा रहा है.
यही हाल राज्यवार बनाए गए नोडल पदाधिकारियों का है. एक दो पदाधिकारियों को छोड़कर कोई अन्य पदाधिकारी से फोन पर बात होना तो दूर किसी तरह की सुगबुगाहट भी नहीं होती है. कई पदाधिकारियों ने अपने फोन को डाइवर्ट करके रख दिया है. जनता परेशान और बेहाल है.
ऐसा लग रहा है कि राज्य सरकार सिर्फ हेल्प नंबर जारी कर और नोडल पदाधिकारी की घोषणा कर जनता को यह बता दी है कि हमने अपना काम कर लिया है. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न भागों में फंसे लोग हम से सीधे पर फोन करके अपने परेशानी बता रहे हैं.
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उन्होंने कहा कि बिहार और केरल में फंसे मजदूरों ने हमें खाद्यान्न मिलने की बात बताई है जबकि महाराष्ट्र में फंसे मजदूरों ने यह बताया है कि यहां स्थिति अत्यंत खराब है. खाद्यान्न उपलब्ध होना तो दूर रहने की भी स्थिति ठीक नहीं है.
डा. लंबोदर महतो ने अपने स्तर से कई मजदूरों के एकाउंट में नेट बैंकिंग के जरिए पैसा ट्रांसफर कराया है और अपने संपर्क के लोगों से फंसे लोगों के बीच खाद्यान्न उपलब्ध कराया है. यह कार्य उन्होंने पुणे में फंसे मजदूरों के बीच भी किया है.

