रांची: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से महेंद्र सिंह धोनी के सन्यास लेने की घोषणा के बाद जहां एक ओर उनके प्रशंसकों में मायूसी है, वहीं एमएस धोनी के प्रारंभिक कोच रहे चंचल भट्टाचार्य ने कहा कि उनके ऐसे फैसले की उम्मीद उन्हें नहीं थी.
वर्ष 2004 में एमएस धोनी के भारतीय क्रिकेट टीम में चयन होने तक प्रारंभिक कोच और प्रशिक्षक रहे चंचल भट्टाचार्य ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि आगामी टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप के बाद धोनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहेंगे, यह वर्ल्ड कप अक्टूबर में ही होना निर्धारित था, लेकिन कोरोना संक्रमण काल के कारण कार्यक्रम में बदलाव आया है, संभवतः इसी कारण धोनी ने आज फैसला लिया.
हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जतायी कि जिस तरह से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज बीसीसीआई से यह अपील की है कि माही का एक फेयरवेल मैच का भव्य आयोजन रांची में हो, उससे यह संभावना बनती है कि बीसीसीआई इस आग्रह पर विचार करेगा और रांची में होने वाले अंतिम मैच के माध्यम से धोनी अपनी धरती पर ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा करेंगे.
चंचल भट्टाचार्य ने बताया कि धोनी प्रारंभ से ही खुद को काफी अनुशासित रखते थे, साथ ही उनकी यह भी एक बड़ी विशेषता थी कि वे अपने को शांत (कूल) रखते थे, इसी कारण उन्हें कैप्टन कूल के नाम से भी जाना जाता था. धोनी का कहना था कि यदि खेल के दौरान दिमाग गर्म होता, तो टीम का प्लान फेल हो जाएगा और विरोधियों की जीत हो जाएगी.
उन्होंने बताया कि 2004 से लेकर आज तक धोनी कभी भी कोई विवाद में नहीं आये, न ही उन्हें कभी भी टीम से जबरन बैठा दिया गया, कुछ मौकों पर आराम करने और अन्य निजी कारणों से उन्होंने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर जरूर रखा.
इस दौरान धोनी ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट वन डे, टेस्ट और टी-ट्वेंटी में भारत को शानदार सफलता दिलायी, क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम एक सफल कप्तान और बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में याद रखा जाएगा.

