मुंगेर: जमालपुर रेल कारखाना ने कोरोना के खिलाफ युद्ध मे हर मोर्चे पर ऐतिहासिक काम किया है. अप्रैल में जीवन रक्षक वेंटिलेटर बनाने के बाद जून के पहले सप्ताह में कोविड-19 के संक्रमण से स्वास्थ्यकर्मियों के बचाव के लिए संजीवनी नामक कोविड-19 रोबोटिक ट्रॉली तैयार किया.
इनोवेटिव आइडिया यहीं नहीं रुका, देश भर में प्रचलित थर्मल स्कैनर में सुधार करते हुए महज 600 रुपए में स्पर्श रहित सेंसर युक्त ऑटोमेटिक थर्मल टेम्प्रेचर रिकॉर्डर बना डाला. वर्तमान थर्मल स्कैनर में ट्रिगर दबाने के दौरान कई लोगों के संक्रमण की चपेट में आने की खबर चर्चा में है.
जानकारी के अनुसार मुख्य कारखाना प्रबंधक सुदर्शन विजय के मार्गदर्शन और उप मुख्य यांत्रिक अभियंता (प्रोडक्शन) प्रेम प्रकाश की अगुवाई में कारखाने के कर्मवीरों की टीम ने अपनी इनोवेटिव रिसर्च यात्रा को जारी रखते हुए इस ऑटोमेटिक थर्मल स्कैनर को बनाया है.
चार सदस्यीय टीम द्वारा तैयार इस जनकल्याणकारी उपकरण को अब कारखाने के अंदर समेत अन्य जगहों मे संक्रमितों के इलाज के लिए सौंपा जाएगा. चार सदस्यीय टीम में पीई डीके शाक्या, एसएसई के टीआईएस चंदन, सिमुलेटर के इंस्ट्रक्टर अमरजीत वर्मा, टीटीएस के सीनियर टेक्नीशियन विश्वजीत कुमार शामिल हैं. इनके अलावे अमित कुमार समेत कुछ सहयोगियों की भूमिका रही है.
बाजारों में उपकरण की कीमत हजारों रुपए
कारखाने के प्रोडक्शन डिपार्टमेंट के कुशल निर्देशन में गठित टीम ने दिन-रात मेहनत कर अपने इनोवेटिव आइडिया, डिजाइन और स्किल के आधार पर इसे तैयार किया है. इसे तैयार करने में चार विशेषज्ञ कर्मियों को लगभग हफ्ते भर लगे. यह डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 के मरीजों की स्पर्श के बिना ही देखभाल में मदद करेगा.
बाजार में इसकी कीमत हजारों में है, मगर यह 600 रुपए में ही तैयार हो गया. किफायती होने के साथ-साथ यह संक्रमणमुक्त भी है. इसमें ट्रिगर दबाने की जरूरत नहीं पड़ती है. सिर्फ सामने खड़े होने के साथ ही इसमें लगे सेंसर की सहायता से मशीन कुछ सेकेंड में तापमान पढ़ लेता है.
मिली जानकारी के अनुसार इस ऑटोमेटिक थर्मल टेम्प्रेचर रिकॉर्डर में करीब 5 बड़े एवं 16 छोटे उपकरण प्रयुक्त किए गए हैं. आईआर सेंसर, थर्मल टेम्प्रेचर सेंसर, डिसप्ले स्क्रीन, वॉल्टेज रेगुलेटर, एडेप्टर, ऑटोमेटिक शट डाउन, एलएम 317, फोटो डायोड, पावर सप्लाय के लिए 220 वोल्ट एसी सहित अन्य सामग्री लगाए गए हैं. तैयार करने में लगे विशेषज्ञों की टीम का मानना है कि जरूरत पड़ने एवं निर्देश मिलने पर इसे जरूरत के लिहाज से तैयार किया जा सकता है.

