गोड्डा: प्रखंड अंतर्गत कदमा गांव में रविवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर एवं मानवाधिकार विषय पर सईद अहमद मेमोरियल ट्रस्ट एवं ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क के तत्वाधान में जिला पार्षद अब्दुल वहाब शम्स की अध्यक्षता में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया.
इस एक दिवसीय सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव अब्दुर रज्जाक, रांची हाईकोर्ट अधिवक्ता सह मानवाधिकार कार्यकर्ता सोनल तिवारी, राजू हेम्ब्रम, समाजसेवी एहतेशाम अहमद मौजूद थे.
सेमिनार की उद्घाटन संयुक्त रुप से संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर की गई. वहीं मौजूद वक्ताओं में अब्दुर रज्जाक ने कहा कि आज जिस प्रकार से संविधान के मूल्यों एवं मानवाधिकार का उल्लंघन कर देश में सीएए लाया गया है. सरकार की मंशा पूरे देश में एनआरसी कराने की है, जिसकी इस देश को कोई जरूरत नहीं थी. इस देश में नागरिकता देने का प्रावधान वर्षों-वर्ष से है,सरकार मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह के असंवैधानिक कदमों को उठा रही है, इसिलिए एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमलोगों का फर्ज बनता है कि हमलोग सरकार के इस अंसवैधानिक कदम से सभी लोगों को वाकिफ कराए.
उन्होंने आगे कहा कि एनआरसी, सीएए से देश के गरीब लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. लोगों का रोजगार तबाह हो जाएगा, देश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा. वहीं सोनल तिवारी ने कहा कि सीएए असंवैधानिक कानून है जो संविधान की मूल भावना, धर्मनिरपेक्षता और समानता के अधिकारों का हनन करता है. सरकार ने सिर्फ तीन देशों को ही क्यों चुना जबकि हमारे देश की सीमा चीन, भूटान, श्रीलंका, म्यामांर से भी है इस कानून से हमारे देश के बारे में अंतर्राष्ट्रीय जगत में गलत संदेश जा रहा है, उन्होंने कहा कि इस तरह का सेमिनार लोगों को इस अंसवैधानिक कानून के दुष्परिणामों से अवगत कराने के लिए किया जा रहा है.
संबोधन के क्रम में राजू हेम्ब्रम ने कहा कि जब देश को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के मसले पर कदम उठाने की जरूरत है तब सरकार अलग-अलग धर्मो के बीच दीवार खड़ी करने की कोशिश कर रही है. आज सरकार आदिवासियों, दलितों के आरक्षण को समाप्त करने पर तुली हुई है. देश को आजाद कराने के लिए सभी मजहब के लोगों ने अपनी कुर्बानी दी है यह देश सभी धर्म के लोगों का बराबरी के रूप में है. हम सभी इस असंवैधानिक कानून का विरोध करते हैं और तब तक विरोध करेंगे जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं ले लेती है.
एहतेशाम अहमद ने कहा कि आज जो भी सरकार के गलत कार्यों का विरोध कर रहे है सरकार उसे देशद्रोही करार दे रही है, जबकि संविधान सभी देशवासियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है. सीएए के विरुद्ध हमलोग अदालत में तो लड़ेंगे ही देश के सड़कों पर भी इस काले कानून के खिलाफ तब तक आंदोलन करेंगे जब तक सरकार इस कदम को वापस नहीं कर लेती है. वहीं कार्यक्रम का संचालन व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता इनाम अहमद कर रहे थे.
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मौके पर सीताराम खैतान, मोहम्मद आलमगीर, सुलेमान जहांगीर आजाद, एहतेशामूल हक, राजेन्द्र मांझी, ताला टुड्डू, सागरमोहन टुड्डू, सुख्खू मांझी, महेंद्र साह, मोहम्मद हबीब, अरशद वहाब, गणेश रविदास, नदीम सरवर, मोहम्मद इकराम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थें.

