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BNN Exclusive: झारखंड कैडर के 2011 बैच के एक IAS होंगे बर्खास्त!

by bnnbharat.com
June 7, 2020
in समाचार
BNN Exclusive: झारखंड कैडर के 2011 बैच के एक IAS होंगे बर्खास्त!
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रवि भारती,

खास बातें:

  • राज्य सरकार ने भारत सरकार को डीम्ड रेजिगनेशन के लिए भेजा प्रस्ताव

  • इससे पहले भी 1992 बैच की महिला आइएएस अफसर ज्योत्सना वर्मा रे हो चुकी हैं बर्खास्त

  • 2011 बैच के आईएएस वाघमारे प्रसाद कृष्णा भी लगभग तीन साल से अधिक समय से बिना सूचना के हैं अनुपस्थित

  • विभागीय कार्यवाही में भी बाघमारे कृष्णा प्रसाद पाए गए हैं दोषी

रांचीः झारखंड की महिला आईएएस अफसर ज्योत्सना वर्मा रे के बाद 2011 बैच के आईएएस वाघमारे कृष्णा प्रसाद भी बर्खास्त होंगे. राज्य सरकार ने भारत सरकार को वाघमारे कृष्णा प्रसाद के खिलाफ डीम्ड रेजिगनेशन का प्रस्ताव भेज दिया है.

2011 बैच के आईएएस वाघमारे प्रसाद कृष्णा भी लगभग तीन साल से अधिक समय से बिना सूचना के अनुपस्थित हैं. साथ ही विभागीय कार्यवाही में भी दोषी पाए गए हैं. विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी सह तात्कालीन अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी ने जांच रिपोर्ट कार्मिक विभाग को सौंपी थी.

आईएएस ज्योत्सना अपने कैडर में वापस नहीं आई

राज्य की पहली महिला आईएएस अफसर ज्योत्सना वर्मा रे बर्खास्त तो हो गयीं, लेकिन उन्होंने झारखंड कैडर में अपना योगदान नहीं दिया। ज्योत्सना वर्मा रे 1992 बैच की आईएएस अफसर थीं.

वह मनीला में विश्व बैंक में प्रतिनियुक्त थीं. प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी वह वहीं बनी रहीं. रिमांडर का भी जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त मान लिया गया.

झारखंड कैडर के एक आईएएस ने भी बयां किया है दर्द

अब राज्य के एक युवा आईएएस ने भी अपनी असहजता जाहिर की है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सरकार का आना-जाना तो लगा रहता है, लेकिन हर बार सिस्टम में बदलाव से परफॉरमेंस पर असर पड़ता है.

झारखंड में काम करने के एवज में एक्सपोजर भी नहीं मिल पाता. हर बेहतर काम में कोई न कोई पेंच आ ही जाता है. ऐसे में सेंट्रल डेप्यूटेशन पर जाना ही अच्छा रहेगा.

युवा आईएएस का मानना है कि झारखंड में सुझावों पर भी अमल नहीं होता. गंभीरता से बातों को सुना नहीं जाता है. जल्दी-जल्दी होने वाली ट्रांसफर पोस्टिंग से भी परफॉरमेंस पर असर पड़ता है.

तबादले के कारण नये कामकाज को समझने में एक से डेढ़ माह का समय लगता है. संबंधित विभाग की नियमावली की जानकारी लेनी पड़ती है. अगर कोई महत्वपूर्ण केस चल रहा है तो उसे समझना पड़ता है.

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