रांचीः झारखंड के मुखिया के तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूसरी पारी के एक साल होने को आए हैं. एक साल के सफर में अब तक कई बड़ी चुनौतियों का सामना करते हुए हेमंत सोरेन निरंतर आगे बढ़ रहे हैं. एक खुशहाल और बेहतर झारखंड का सपना साकार करने को अपनी पूरी ऊर्जा और ताकत झोंक चुके हैं. वैश्विक महामारी के साथ आयी कई समस्याओं से दो-चार होते हुए राज्य के गरीब और उपेक्षित लोगों के बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने में दिन-रात लगे हैं.
29 दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद हेमंत सोरेन पीछे मुड़कर नहीं देखे. गठबंधन सरकार के मुखिया के रूप में साथी दलों के साथ जनता से किए चुनावी वायदों को सरजमीं पर उतारने के लिए पूरी शिद्दत के साथ जुटे हैं. झारखंड विधानसभा में जनगणना 2021 में अलग सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रावधान लागू करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजने को मंजूरी दी गई.

👉 अपने दम पर सूबे की रहबरी की कर रहे जरूरते पूरी
विडंबना है कि नई सरकार के गठन होते ही वैश्विक संकट कोरोना संक्रमण ने देश के तमाम राज्यों के साथ झारखंड को भी अपनी चपेट में ले लिया. नए वित्तीय वर्ष का बजट विधानसभा से पारित हो चुका था. कोरोना के कारण बजट सत्र को भी समय से पहले निपटाना पड़ा. फिर अस्पतालों, चिकित्सा व्यवस्था और कोरोना वोलेंटियर्स को लेकर पूरी मुस्तैदी के साथ लोगों की जान बचाने के लिए डट गए. दूसरी ओर देश के दूसरे शहरों में रह रहे अपने यहां के मजदूर भाइयों को सुरक्षित वापस लाने, दूसरे राज्यों में पढ़नेवाले छात्र-छात्राओं की घर वापसी कराने और कोरोना संक्रमण से राज्य को बचाने का बहुआयामी काम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक साथ शुरू कर दिया.
केंद्र सरकार से बार-बार विशेष ट्रेन की गुहार लगाकर ट्रेनों से सबसे पहले प्रवासी मजदूर भाइयों को घर वापस लाने की पहल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की थी. जो मजदूर भाई ट्रेनों से नहीं आ सकते थे, उन्हें हवाई जहाज से बुलवाया. उनके लिए रास्ते से लेकर अगले पंद्रह दिनों के राशन-पानी का इंतजाम भी करके दिया. गांव में ज्यों-ज्यों मजदूर भाइयों की वापसी होने लगी, गांव में उनके ठहरने और चिकित्सा निगरानी के तहत बीमार मजदूर भाइयों के इलाज के साथ खाने-पीने का प्रबंध कराया. गांव-गांव में प्रवासी मजदूरों के लौटने की संख्या बढ़ने लगी. उनके लिए रोजी-रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की.

👉 केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाने के बाद भी सपनों को कर रहे साकार
मनरेगा के तहत मु्ख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साधन उपलब्ध कराए. इस बीच केंद्र सरकार से कोरोना के इलाज में आवश्यक संसाधन और धन मुहैया कराने की गुहार लगाई. लेकिन सरकार को इस बात का मलाल है कि केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया. सरकार ने बजट तो पास करा लिया लेकिन खजाने में जितने पैसे आने चाहिए, वैसा नहीं आ पा रहा था. केंद्र सरकार से मुख्यमंत्री हेमंत सोरोने ने राज्य को मिलनेवाले जीएसटी का हिस्सा मांगा. किंतु केंद्र ने पैसे देने से इंकार कर दिया. फिर अपने संसाधनों के बूते मुख्यमंत्री कोरोना से लोगों को बचाने के लिए जूझते रहे.
कोयले के हिस्से का भी पैसा राज्य को अभी तक नहीं मिल पाया है. मुख्यमंत्री के सामने रोजगार सृजन और आम लोगों की कोरोना से सुरक्षा, दो सबसे बड़ी चुनौती से लगातार सामना करना पड़ रहा है. राज्य के अंदर सबको रोजगार मुहैया कराना संभव नहीं है, लेकिन बड़ी आबादी आत्म निर्भर हो जाए तो राज्य के लिए बड़ी राहत हो सकती है. लिहाजा मुख्यमंत्री ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया.

👉 आत्मनिर्भर बनाने को तीन अहम योजनाएं
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने तीन नई योजनाओं की शुरुआत की है. ग्रामीण विकास विभाग की इन योजनाओं का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुभारंभ किया. ग्रामीण विकास विभाग की पहल पर शुरू होने वाली इन स्कीमों से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा फूलो झानो आशीर्वाद योजना, आजीविका संवर्धन हुनर अभियान यानी आशा और पलाश ब्रांड के जरिये ग्रामीण महिलाओं, युवकों के साथ-साथ कोरोना संकट में बाहर से लौटे श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने की सरकार की कोशिश है.
पलाश ब्रांड के जरिए ना केवल बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय लोगों को हुनर दिखाने का अवसर भी मिलेगा. पलाश ब्रांड में अधिक से अधिक उत्पादों को जोड़ने की कवायद की जाएगी. इसकी मार्केटिंग यदि अच्छे ढ़ंग से हो जाती है, तो राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम होगा.

👉 पलाश ब्रांड के समानों का घर में उपयोग
मुख्यमंत्री ने पलाश ब्रांड के सामानों को अपने घर में उपयोग करने की घोषणा की. सरकार का संकल्प है कि राज्य की महिलाएं सड़कों पर हड़िया-दारु नहीं बेचेंगी. उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जायेगा. फुलो झानो आशीर्वाद अभियान के तहत सड़क किनारे दारू और हड़िया बेचने वाली महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर हड़िया दारू बेचने की कुप्रथा को सरकार खत्म करना चाहती है. आजीविका संवर्धन हुनर अभियान यानी आशा का लाभ करीब 17 लाख परिवारों को मिलेगा. इसके माध्यम से सखी मंडल की बहनें कृषि आधारित आजीविका से जुड़ेंगी.
सखी मंडल द्वारा निर्मित सामानों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग की व्यवस्था होगी. साथ ही समाज के अति गरीब तबके एवं दारु हड़िया बेचने वाली महिलाओं को कौंसिलिंग कर आजीविका के अन्य साधनों से जोड़ा जायेगा. फुलो झानो आशीर्वाद योजना के तहत हड़िया-दारू के निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को चिन्हित कर सम्मानजनक आजीविका के साधनों से जोड़ा जाएगा. राज्य की 15 हजार से ज्यादा हड़िया-दारू निर्माण एवं बिक्री से जुड़ी महिलाओं का सर्वेक्षण मिशन नवजीवन के तहत किया जा चुका है. इन महिलाओं को मुख्यधारा की आजीविका से सरकार जोड़ेगी.

👉 किसानों की कर्ज माफी से जीता दिल
झारखंड कृषि ऋण माफी योजना के तहत दो हजार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई . इसके लाभुक झारखंड के सभी रैयत और गैर रैयत होंगे. 31 मार्च 2020 तक मानक फसल के तहत झारखंड के किसी भी बैंक से फसल अल्पावधि भीम लिए हो ऋण का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा इसमें ₹50000 तक का बकाया राशि माफ किया जाएगा. एक परिवार के एक सदस्य को ही इसका लाभ मिलेगा आवेदन के लिए ₹1 सेवा शुल्क देना होगा वहीं. यही नहीं झारखंड में लाह का प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग और वन विभाग द्वारा लाह उत्पादन वृद्धि योजना की स्वीकृति दी गई इसके तहत 1200000 परिवार को 5200 रुपए प्रति वर्ष अतिरिक्त आय सृजन करने का लक्ष्य रखा गया है.

👉 पेंशनधारियों, गरीबों और खुदरा उत्पाद दुकानदारों के लिए सराहनीय पहल
राज्य सरकार ने पेंशन धारियों को बड़ा तोहफा दिया. राज्य भर के पेंशन धारियों का भुगतान उसी महीने की 25 तारीख से अंतिम तिथि तक किया जाएगा पेंशन धारियों को अब अगले महीने का इंतजार नहीं करना होगा. सोना सोबरन धोती साड़ी वितरण योजना के तहत एक धोती-लूंगी व साड़ी प्रति परिवार को ₹10 की अनुदानित दर पर देगी. इस योजना का लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आने वाले 57 लाख परिवारों को मिलेगा इसके लिए 200 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान है. खुदरा उत्पाद दुकानदारों को बड़ी राहत दी है. 22 मार्च 2020 से लॉकडाउन की तिथि तक उत्पाद राजस्व को माफ करने का निर्णय लिया.

