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राजमहल पर्वत श्रृंखला के 12 पहाड़ ही गायब! 5 करोड़ साल साल पुरानी थी ये विरासत

by bnnbharat.com
April 1, 2021
in समाचार
राजमहल पर्वत श्रृंखला के 12 पहाड़ ही गायब! 5 करोड़ साल साल पुरानी थी ये विरासत
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रांची: पर्यावरण को लेकर सरकार क्या वायदे करती है? और जमीन पर उसकी हकीकत क्या है? इसका पता इस खबर से लग जाएगा. प्रदेश में माफिया राज इतना हावी है कि भारी-भरकम शासन-प्रशासन के रहते भी करोड़ों साल पुरानी विरासतों को मिटा रहा है और देखने वाला कोई नहीं. , झारखंड के चार जिलों-दुमका, गोड्‌डा, पाकुड़ और साहिबगंज तक फैली 10 करोड़ वर्ष पुरानी राजमहल पर्वत शृंखला की 12 पहाड़ियां गायब हो गई हैं. खास बात ये है कि ये पहाड़ियां हिमालय से 5 करोड़ वर्ष पहले बनीं. दशकों में बनी इन पहाड़ियों का अस्तित्व खत्म करने में कुछ साल ही लगे. माइनिंग माफिया ने गदवा-नासा, अमजोला, पंगड़ो, गुरमी, बोरना, धोकुटी, बेकचुरी, तेलियागड़ी, बांसकोला, गड़ी, सुंदरपहाड़ी, मोराकुट्टी पहाड़ियों का अस्तित्व अवैध खुदाई कर खत्म कर दिया. साहिबगंज के पीजी कॉलेज में भूगर्भशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. रंजीत प्रसाद सिंह ने बताया कि गदवा पहाड़ी का अस्तित्व हद से ज्यादा खनन के कारण 17 साल में ही खत्म होने के कगार पर है. अखबार की रिपोर्ट से पता चला कि नियम-कानून ताक पर रखकर माइनिंग माफिया गदवा के बचे हिस्से की दिन-रात खुदाई कर रहे हैं. इस काम के लिए उन्हें खनन विभाग, पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और कुछ सफेदपोशों का संरक्षण मिला हुआ है. इस मिलीभगत पर जब साहिबगंज के डीसी रामनिवास यादव से सवाल पूछे गए तो उन्होंने उल्टे अखबार के संवाददाता से ही अवैध उत्खनन के सबूत मांगे. उन्होंने कहा कि यहां आकर प्रमाण दें. हालांकि अखबार ने दावा किया है कि जिला टास्क फोर्स लगातार छापेमारी कर रही है और अवैध क्रशर सील किए जा रहे हैं.

इस तरह सिस्टम खोखला कर रहे माफिया

  1. लीज रद्द पर सुनवाई के बीच ही दूसरे को आवंटित

बांसकोला में गदवा मौजा के प्लॉट 60, 61, 62 के 5.76 एकड़ की लीज जयराम दास को 18.08.1999 से 10 वर्षों के लिए दी गई. पर मोतीझरना और औषधीय पौधों को संरक्षित करने के लिए लीज रद्द कर दी गई. मामले की सुनवाई उपायुक्त कोर्ट में शुरू हुई. इधर सुनवाई चल रही थी, उधर भूखंड पर मोहन एंड संजय स्टोन वर्क्स का बोर्ड लग गया. खनन चलता रहा और 2016 में इसे सीटीओ दे दिया गया.

  1. पहाड़ जमींदोज, अब जमीन खोदकर पाताल तक जा रहे

राजमहल पर्वत शृंखला पर खनन के लिए 184 लोगों को लीज मिली है. पर, माफिया भी अवैध खनन कर रहे हैं. सीमांकन की जांच नहीं करने से आवंटित क्षेत्र से कई गुना अधिक खनन हो रहा है. यही कारण है कि गदवा पहाड़ी सिर्फ शिवलिंग के रूप में बची है. खनन माफिया ने इस पहाड़ को पहले खोदकर जमीन से मिला दिया और अब जमीन खोदकर पाताल से मिला रहे हैं. शृंखला की कई अन्य पहाड़ियों की तलहटी में भी लगातार खनन जारी है.

  1. माफिया ने 2 चेक डैम भरकर मैदान बना दिया

बड़ी भगियामारी में ग्रामीणों के लिए चेक डैम बना था, पर डैम से 50 मीटर दूर ही खनन पट्टा व क्रशर का लाइसेंस दे दिया गया है. क्रशर के डस्ट से डैम का अस्तित्व ही खत्म हो गया है. सकरीगली के किरुकुड़िया में भी जमुनी डैम था. अब यह डस्ट का मैदान बन गया है. जबकि संकरीगली स्टेशन, रेलवे लाइन और एनएच-80 के किनारे भी कदम-कदम पर पत्थर के डस्ट की डंपिंग हो रही है.

ये पहाड़ियां हुई गायब

गौरतलब है कि कार्बन डेटिंग के अनुसार राजमहल शृंखला 10 करोड़, हिमालय 5 करोड़, जबकि अरावली 57 करोड़ वर्ष पुरानी है. राजमहल पर्वत शृंखला का निर्माण ज्वालामुखी विस्फोट से हुआ है. यह 26 सौ वर्ग किलोमीटर में फैली है और इसकी सर्वाधिक ऊंचाई 567 मीटर है. माइनिंग माफिया ने गदवा-नासा, अमजोला, पंगड़ो, गुरमी, बोरना, धोकुटी, बेकचुरी, तेलियागड़ी, बांसकोला, गड़ी, सुंदरपहाड़ी, मोराकुट्टी पहाड़ियों का अस्तित्व ही खत्म कर दिया.

NGT ने ये कहा था अपनी रिपोर्ट में

NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की रिपोर्ट में भी राजमहल की पहाड़ियों पर अवैध खनन को लेकर कई गड़बड़ियों की बात कही गई है. कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा है कि बड़ी कोदरजना के एक अवैध क्रशर की जांंच में जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि इसे बंद कर केस किया गया है. पर, हमें क्रशर चलने के सबूत मिले. वहां टंकी का पानी गर्म था और डीजी जेनरेटर को मौके से हटाकर बगल में रखा गया था.

जिला खनन पदाधिकारी ने कमेटी को बताया कि सुंदरा मौजा में कुछ अवैध पत्थर खदानों पर कार्रवाई की गई है. टीम जब वहां पहुंची तो बीच रास्ते में ही एक ट्रक सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया. वहां एक-दो लोग मौजूद थे, पर ट्रक ड्राइवर नहीं था.

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