BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

गोला में हाथियों का तांडव, फसलों को किया तहस नहस

by bnnbharat.com
November 13, 2020
in समाचार
गोला में हाथियों का तांडव, फसलों को किया तहस नहस
Share on FacebookShare on Twitter

हाथी- मानव द्वंद रोकना वन विभाग के लिए बनी चुनौती

हाथी और जंगली जानवरों ने अब तक एक लाख 90 हजार 800 लोगों को नुकसान पहुंचाया

वन विभाग अब तक बांट चुका है 32 करोड़ से अधिक का मुआवजा

रांचीः गोला के रकुवा में  आधा दर्जन हांथीयों का झुंड पहुंचा. हाथियों के झुंड ने खेत में लगे फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया. इसी बीच एक हाथी का बच्चा कुंआ में गिर गया. जिसे ग्रामीणों के सहयोग से बाहर निकाला गया.  वहीं  झारखंड में हाथी-मानव द्वंद को वन विभाग अब तक रोक नहीं पाया है.

राज्य गठन से लेकर अब तक गजराज ने 1400 लोगों की जानें लील ली हैं. जो असमय ही काल का ग्रास बन गए पर अफसोस इसके बावजूद  हाथियों व जंगली जानवरों का हमला जारी है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक हाथी और जंगली जानवरों ने एक लाख 90 हजार 800 लोगों को नुकसान पहुंचाया है. इसमें फसल का नुकसान, पशुओं का नुकसान, मकानों का नुकसान और अनाज का नुकसान शामिल हैं.

जंगली जानवरों के शिकार (मौत) हो चुके लोगों पर इसके एवज में वन विभाग 13 करोड़ रुपये मुआवजा बांट चुका है. 1900 लोग घायल हो चुके हैं, इसके एवज में 3.50 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा गया है. 109500 लोगों के फसल का नुकसान, पशु का नुकसान, मकान का नुकसान और अनाज का नुकसान हुआ.

इसके एवज में 32 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है. हाथियों पर काबू पाने के लिये वन विभाग योजनाएं तो बना रहा है,लेकिन वह कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं और इस विफल योजना की भरपाई आम लोग अपनी जान माल देकर चुका रहे हैं. हाथियों के भ्रमण के लिये कॉरिडोर (एक प्राकृतिक स्थल से दूसरे प्राकृतिक स्थल तक) तैयार किया जाना था, इसके लिये जीआइएस मैपिंग भी हुई, लेकिन यह कॉरिडोर अब तक नहीं बन पाया है.

राज्य के अंदर पूर्वी सिंहभूम, प. सिंहभूम, गिरिडीह और दुमका में कॉरिडोर बनाना था. वहीं अंतरराज्यीय कॉरिडोर उड़ीसा-चाईबासा, उड़ीसा- सारंडा, पूर्णिया-दलमा और सरायकेला- बंगाल में बनाया जाना था. लेकिन यह योजना भी धरी की धरी रह गई. राज्य गठन के बाद से हाथियों के लिये एलिफेंट रेसक्यू सेंटर भी बनाया जाना था पर वह भी नहीं बन पाया. धनबाद के वन क्षेत्र और दलमा में रेसक्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव था.

वन विभाग के अनुसार, एक हाथी दो से पांच वर्ग किलोमीटर में भ्रमण करता है. इस हिसाब से धनबाद का वन क्षेत्र रेसक्यू सेंटर के लिये उचित नहीं है. पूरे एरिया की फेंसिंग होती ,हाथियों के लिए खाने पीने का पूरा इंतजाम होता है, हाथियों की सुरक्षा का इंतजाम होता है हाथियों के पुनर्वास का आभाव भी इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है. हाथियों के भ्रमण का रास्ता बदल गया है. छोटे-छोटे पैकेज में जंगल होने के कारण हाथी भटक रहे हैं और इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

दोस्त की गिरफ्तारी के बाद NCB दफ्तर पहुंचे अर्जुन रामपाल

Next Post

ये भारतीय बल्लेबाज है मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: जस्टिन लैंगर

Next Post
ये भारतीय बल्लेबाज है मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: जस्टिन लैंगर

ये भारतीय बल्लेबाज है मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: जस्टिन लैंगर

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d