सरायकेला-खरसावां: जिले के आदित्यपुर नगर निगम में लॉकडाउन के 10वें दिन होते ही जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लोगों में आक्रोश शुरू हो गया है.
एक तरफ सरकार दावा कर रही है कि लॉकडाउन के अवधि में किसी जरूरतमंदों को परेशानियों का सामना करने नहीं दिया जाएगा. साथ ही सरकार यह भी दावा कर रही है कि सरकार के खजाने में पर्याप्त मात्रा में अनाज उपलब्ध है.
लेकिन सरायकेला- खरसावां जिला के आदित्यपुर नगर निगम की यह तस्वीर कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है.
आपको बता दें कि यह तस्वीर आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 12 और 13 की है. जहां वार्ड के लोगों ने अपने जनप्रतिनिधि यानि स्थानीय पार्षदों और विधायक के खिलाफ पोस्टर वार शुरू कर दिया है.
इन पोस्टरों में साफ तौर पर बस्ती वासियों ने पार्षदों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए पार्षदों के खिलाफ मुर्दाबाद जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया है.
हालांकि इस संबंध में लॉकडाउन होने के कारण लोगों से बात नहीं हो सकी, लेकिन दोनों ही वार्डो के पार्षदों ने इसके पीछे शरारती तत्वों का हाथ बताया.
वार्ड 12 के पार्षद विक्रम किस्कू ने बताया कि इस महामारी के दौरान वे अपने पॉकेट के फंडों का प्रयोग कर वार्ड के लोगों की समस्याओं का समाधान करने में लगे हुए हैं.
लेकिन इस तरह की हरकत कर कुछ शरारती तत्व मनोबल को गिराने का काम कर रहे हैं. वहीं वार्ड 13 के पार्षद नील पद्मा विश्वास ने कहा, सीमित संसाधन के बीच मानव सेवा करने का यह सिला मिला है.
वैसे उन्होंने भी इसके पीछे शरारती तत्वों का हाथ बताया. अब सवाल यह उठता है कि आखिर शरारती तत्व एक या दो जगह पोस्टर बाजी कर सकता है, लेकिन पूरे बस्ती के चौक- चौराहों और गलियों में अगर पोस्टर बाजी हुई है तो कहीं ना कहीं लोगों में पार्षदों और विधायक के खिलाफ नाराजगी जरूर है, जो पोस्टरों के माध्यम से साफ दर्ज किया गया है.
ऐसे में आप समझ सकते हैं कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में कितना फर्क है. वैसे आज भी लोग दाने-दाने को मोहताज हैं.
वैसे धुआं अगर एक वार्ड में उठा है तो इसकी धधक कहीं 35 वार्डों को अपने चपेट में न ले ले. वैसे किसी को पीडीएस डीलर से परेशानी हो रही है, तो किसी को सरकारी राहत और बचाव से. ऐसे में अगर यही स्थिति रही तो आने वाले 11 दिन और भी भयावह हो सकता है. साथ ही अन्य पार्षदों के लिए यह पोस्टर वॉर एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है.

