रांची: आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ सूर्यकांत शुक्ला ने कहा है कि कोरोना संकट से देश की अर्थव्यवस्था को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए 20 लाख करोड़ यानी जीडीपी का 10 प्रतिशत आकार का राहत पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री ने आज देश के नाम अपने संबोधन में की है.
उन्होंने कहा कि राहत का ये आकार दिखने में बड़ा दिख रहा है, लेकिन वास्तविकता में यह सिर्फ न्यूनतम जरुरत को ही पूरा करता है, क्योंकि 54 दिनों के लॉकडाउन में तीन चौथाई बंदी को आधार मानने से नुकसान का आकार 22.2 लाख करोड़ रुपये का होगा है, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था 200 करोड़ रुपये की है.
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि घोषित राहत पैकेज का वित्तपोषण कैसे होगा, यह तय करना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, क्या घाटे का मुद्रीकरण यानी मनी प्रिंट करके होगा या आरबीआई मनी की आपूर्ति सिस्टम में बढ़ा कर करेगी या सरकारी विदेशी करेंसी बांड बेचकर जुटाएगी, तभी यह पता चलेगा कि राजकोषीय घाटा का आकार कैसे होगा.
वैसे जीडीपी की तुलना में 10 प्रतिशत आकार के राहत पैकेज की घोषणा कर एक अच्छा पहल है, जिसका बाजार इंतजार कर रहा था. अमेरिका ने भी पहले चरण में 10 प्रतिशत राहत पैकेज की घोषणा की थी.

