पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर गैर इस्लामिक बताते हुए कहा कि इस्लामी इतिहास में दूसरों का जबरन धर्म परिवर्तन की कोई मिसाल नहीं है। मीडिया रिपोर्ट से जानकारी मिली। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक दिवस पर इमरान ने इस्लामाबाद में ऐवान-ए-सदर (राष्ट्रपति भवन) में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान इमरान ने कहा कि पैगंबर ने खुद भी अल्पसंख्यकों को धार्मिक स्वतंत्रता दी थी और उनके उपासना स्थलों को सुरक्षा प्रदान की थी, तो हम किसी को जबरन धर्म परिवर्तन कैसे करा सकते हैं। चाहे (गैर मुस्लिम) लड़कियों से शादी से बंदूक की नोक पर शादी कराना हो या फिर किसी भी हिंदू का जबरन धर्म परिवर्तन कराना ये सारी चीजें गैर-इस्लामिक हैं। अगर अल्लाह ने पैंगबरों को अपना विश्वास किसी पर थोपने की शक्ति नहीं दी, तो फिर हम ऐसा करने वाले कौन होते हैं?
इमरान ने कहा कि वह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके उपासना स्थलों को विकसित करने की शपथ लेते हैं। इमरान का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अप्रैल में ही पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और शादी पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दक्षिणी सिंध प्रांत में पिछले साल 1,000 ऐसे मामले सामने आए थे।

