रांची: राज्य में दिसंबर में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कब होंगे कहा नहीं जा सकता. राज्य निर्वाचन आयोग में मुख्य आधिकारिक पद खाली होने की वजह से ये चुनाव लटक गए हैं. सरकार की इस लेटलतीफी की वजह से राज्य में पंचायती राज चुनाव का संकट खड़ा हो गया है. हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को पत्र लिखकर इस संबंध में सूचना दे दी है. इस स्थिति में राज्य को केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता से हाथ धोना पड़ सकता है. चुनाव आयोग राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनावों को पहले ही अनिश्चितकाल समय के लिए टाल चुकी है.
राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र लिखकर सरकार को बता दिया है कि यहां निर्वाचन आयुक्त से लेकर सचिव तक के पद खाली हैं. 2015 में हुए पंचायत चुनाव के पांच वर्ष का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग में अधिकारी न होने की वजह से चुनाव कार्य भी बाधित हो रहा है.
गौरतलब है कि इस स्थिति में राज्य में गांव की सरकार कागजों पर ही सिमटकर रह जाएगी. सरकार द्वारा 2015 में निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल न तो बढ़ाया गया है और न ही चुनाव को लेकर कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
बता दें, इससे पहले धनबाद, देवघर, चास नगर निगम सहित राज्य के 15 शहरी नगर निकायों में मई में चुनाव कराए जाने थे, मगर कोरोना संकट के कारण आयोग ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया था. इस बीच राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल भी खत्म हो गया और चुनाव टलते चले गए.

