चतरा: बदहाली और बदकिस्मती पर आंसू बहाने वाले चतरा के सिमरिया रेफरल अस्पताल की दशा और दिशा दोनों बदलने वाले है. अस्पताल का देखरेख अब सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर सेवा देना वाला मुंबई का टाटा ट्रस्ट ट्राई (ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया) के जिम्मे होगी. हालांकि बुनियादी सुविधाएं जिला प्रशासन ही उपलब्ध कराएगी, लेकिन मरीजों का उपचार एवं देखभाल समेत सारी व्यवस्थाएं टाटा ट्रस्ट के जिम्मे होगी. इसे लेकर जिला प्रशासन का आज टाटा ट्रस्ट से एमओयू हुआ. उपायुक्त जितेंद्र कुमार सिंह और टाटा ट्रस्ट में स्वास्थ्य निदेशक सीतारामा के बीच यह इकरारनामा हुआ है. इकरारनामा डीसी ऑफिस स्थित सभा कक्ष में हुआ. जहां डीडीसी मुरली मनोहर प्रसाद, सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार पासवान, आकांक्षी जिला के प्रभारी, आकांक्षी जिला फेलो नीलेश भट्टाचार्य और आशीष कुमार के अलावा टाटा ट्रस्ट के कई अधिकारी उपस्थित थे.
गौरतलब है कि चतरा स्वास्थ्य के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट के साथ एमओयू करनेवाला झारखंड का पहला जिला है. उपायुक्त ने बताया कि एमओयू तीन वर्षों के लिए हुआ है. अस्पताल के जीर्णोद्धार में डीएमएफटी फंड का भी उपयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि से सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा. आधारभूत संरचनाओं को सशक्त किया जाएगा और विभिन्न प्रकार के रोगों का बेहतर से बेहतर उपचार होगा. यदि आवश्यकता पड़ी, तो दिल्ली और चेन्नई से भी यहां डॉक्टर आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि चिकित्सीय सुविधा न सिर्फ जिले में, बल्कि पूरे झारखंड में अव्वल श्रेणी का उपलब्ध कराना उनका उद्देश्य है. सिमरिया डीएमएफी प्रभावित क्षेत्रों में शुमार है. ऐसे में डीएमएफटी की राशि खर्च करने में कोई दिक्कत नहीं है. टाटा ट्रस्ट के अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में झारखंड में काम करने का यह पहला अनुभव होगा. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब आदि प्रदेशों में टाटा बेहतर काम कर रहा है. एमओयू के बाद टाटा ट्रस्ट के अधिकारियों का दल सिमरिया पहुंच कर रेफर अस्पताल का निरीक्षण किया.
साढ़े छह महीनों में दो एमओयू
चतरा को देश के अग्रणी जिलों में शुमार करने के लिए जिला प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है. यही कारण है कि पिछले साढ़े 6 महीनों के भीतर देश के सुप्रसिद्ध दो संस्थाओं के साथ एमओयू किया है. पहला एमओयू टिस के साथ 2 मार्च को हुआ है. मुंबई की टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के साथ एमओयू जिले की आधारभूत संरचनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया गया है, तो वहीं टाटा ट्रस्ट ट्राई के साथ स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए किया गया है. टिस का करारदात एक वर्ष का है. वहीं ट्राई का इकरारनामा तीन वर्षों का है.
स्वास्थ्य की बेहतर होगी सुविधा
टाटा ट्रस्ट के साथ एमओयू होने के बाद यह तो स्पष्ट हो गया है कि स्वास्थ्य सुविधा में अपेक्षाकृत सुधार होगी. मामूली से लेकर गंभीर बीमारियों का उपचार सिमरिया के रेफरल अस्पताल में होगा, जैसा कि उपायुक्त ने पत्रकारों को एमओयू से पूर्व बताया, उससे तो यह स्पष्ट है कि अस्पताल का दिशा और दशा बदलने वाला है. गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को रांची या दूसरे शहरों के अस्पतालों का चक्कर नहीं काटना होगा, उनका समुचित उपचार सिमरिया में ही होगा. रेफर अस्पताल की स्थिति को देखने के बाद स्वत: सरकारी अस्पतालों की स्थिति में सुधार आएगी.
बताते चलें कि चतरा आकांक्षी जिलों में शामिल है. जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अत्यंत ही बदतर है. डॉक्टर से लेकर कर्मियों तक का अभाव है. यही करण है कि डेल्टा रैंकिग में स्वास्थ्य की स्थिति हमेशा खराब आती रही है.

