रांची: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज रांची स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान परिसर में आकाशवाणी, दूरदर्शन और पीआईबी की ओर से महिला सशक्तिकरण, कौशल और उद्यमिता तथा खेलों में महिलाओं की भागीदारी विषय पर राउंड टेबल परिचर्चा का आयोजन किया गया. इस मौके पर वक्ता के रूप में संत जेवियर काॅलेज की लेफ्टिनेंट प्रोफेसर प्रिया श्रीवास्तव, आईआईएम रांची की बोर्ड सदस्य प्रोफेसर रेखा सिंघल और मेकाॅन में टेक्निकल सर्विस की जनरल मैनेजर मणि मेकाला दासगुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए. प्रोफेसर रेखा सिंघल ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समाज की सोच में परिवर्तन लाना जरूरी है.
इस अवसर पर बोलते हुए हुए प्रोफेसर श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं को भी आर्म्ड फोर्सेज में आना चाहिए. उन्होंने महिलाओं को कहा कि सेना की सेवा से हमें संघर्ष करने की शक्ति मिलती है. कोई भी व्यक्ति सेना में अपनी सेवा दे सकता है, जैसे एनसीसी के जरिए हम देश सेवा कर सकते है. इससे समाज में हमारी एक अलग पहचान बनती है.
उन्होंने शुरुआत से सेना में महिलाओं की भूमिका पर भी चर्चा किया और कहा कि उनके लगन और मेहनत का नतीजा है जो आज सेना में हमें 10 नॉन बैटलफील्ड बटालियन में स्थायी कमीशन मिल गया है.
प्रो० श्रीवास्तव ने आगे कहा कि समाज महिला, खेलों एवं उससे सम्बंधित खबरों में ज्यादा रूचि नहीं दिखाता है, जबकि हमें महिलाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने के लिए उचित मंच एवं अवसर प्रदान करते हुए उनका समुचित सम्मान करना चाहिए.
प्रोफेसर रेखा सिंघल ने महिला सशक्तिकरण पर कहा कि महिलाएं सशक्त ही पैदा होती हैं. समाज उनके प्रति यदि अपनी सोच और नजरिया बदल दे तो हमें और ज्यादा कुछ करने की जरूरत न पड़ें और वो अपना मनचाहा मुकाम खुद हासिल कर लेंगी. समाज को यह अवश्य स्वीकार करना सीखना चाहिए कि उस सशक्त बालिका के साथ कैसा व्यवहार किया जाए. महिला सशक्तिकरण, महिला को नहीं बल्कि समाज को करना है.
साथ ही उन्होंने कहा कि लड़कियों की बढ़ती उम्र के साथ ही उनके परिवार एवं समाज द्वारा अनेकों बंदिशें लगानी शुरू हो जाती है, जिससे उनका बहुमुखी विकास अवरूद्ध हो जाता है. आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि खुद को आत्म निर्भर बनाने के सिवायें इसका और कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि आर्थिक आत्मनिर्भरता ही उन्हें आत्म सम्मान और खुद की पहचान दिलाती है.
कौशल विकास एवं महिला उद्यमिता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे जन्मजात ही उद्यमशील होती हैं. घर से लेकर समाज के हर क्षेत्र में वे पुरुषों से बेहतर प्लानिंग करती हैं. खेलों में महिलाओं की भागीदारी पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही लड़कियों के खेलने पर सामाजिकता के बहाने तरह तरह की बंदिशें लगाना शुरू कर देते हैं. प्रोफेसर सिंघल ने लड़कियों के खेलों में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी के लिए फिर से समाज में सकारात्मक सोच लाने की बात कही.
मेकॉन की जीएम एम.एम. दासगुप्ता ने कहा कि हमने देखा है कि किसी भी संस्था में स्वैच्छिक कार्यों के लिए महिलायें ज्यादा आगे और तत्पर रहती हैं. वर्तमान में संस्थाएं एक महिला को भी समान अवसर प्रदान कर रहीं है यह आप पर निर्भर है कि आप इसे अपने कार्यों और मेहनत से अपने लिए इस्तेमाल करें. दिक्कत तब आती है जब कोई महिला किसी चीज का दुरुपयोग करती है जैसे बच्चों को लेकर अनावश्यक छुट्टियां लेना, इत्यादि. एक संस्था में उनको पुरुषों के बराबर मेहनत और कार्य करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
राउंड टेबल परिचर्चा की समाप्ति करते हुऐ पीआईबी के अपर महानिर्देशक अरिमर्दन सिंह ने महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास एवं उत्थान के लिए किए जा रहे सरकार के प्रयासों एवं इससे हर स्तर पर आये बदलावों की चर्चा की. इस आयोजन में आईआईएम रांची के छात्रों विशेष कर भारी तादाद में उपस्थित छात्राओं ने विषय विशेषज्ञों से अनेक बिंदुओ पर प्रश्न कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया.

