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पीयूष गोयल 8वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में होंगे शामिल, RCEP पर होगी बातचीत

by bnnbharat.com
October 11, 2019
in समाचार
पीयूष गोयल 8वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में होंगे शामिल, RCEP पर होगी बातचीत

Piyush Goyal to be included in 8th ministerial meeting, talks on RCEP

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नई दिल्ली: आसियान और चीन सहित कई अन्य देशों के साथ होने वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थ‍िक साझेदारी (RCEP) पर बातचीत के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज यानी शुक्रवार को थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक जा रहे हैं. इस समझौते के लिए 8वीं मंत्रिस्तरीय बैठक होने जा रही है.  इस व्यापार समझौते का संघ परिवार से जुड़ी संस्था स्वदेशी जागरण मंच (SJM) विरोध कर रही है. क्या है यह RCEP और क्या है पूरा मसला, इसके बारे में आइए विस्तार से जानते हैं.

रीजनल कॉम्प्रीहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) एक ऐसा प्रस्त‍ावित व्यापक व्यापार समझौता है जिसके लिए आसियान के 10 देशों के अलावा 6 अन्य देश-चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्ष‍िण कोरिया, जापान और न्यूजीलैंड के बीच बातचीत चल रही है. इसके लिए बातचीत साल 2013 से ही चल रही है और चल रही वार्ता को इसी साल नवंबर तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य है.

आसियान के 10 सदस्य देशों में ब्रुनेई, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं. आसियान के साथ बाकी छह देशों का मुक्त व्यापार समझौता पहले से है. 4 नवंबर को बैंकॉक में इन सभी देशों के लीडर्स की समिट होगी, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे. उसके पहले यह अंतिम मंत्रिस्तरीय बैठक है.

आरसीईपी के द्वारा सभी 16 देशों को शामिल करते हुए एक ‘एकीकृत बाजार’ बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिससे इन देशों के उत्पादों और सेवाओं के लिए एक-दूसरे देश में पहुंच आसान हो जाएगी. इससे व्यापार की बाधाएं कम होंगी.  साथ ही, निवेश, आर्थ‍िक एवं तकनीकी सहयोग, विवाद समाधान, ई-कॉमर्स आदि को बढ़ावा मिलेगा. इस समझौते के 25 चैप्टर में से 21 को अंतिम रूप दिया जा चुका है.

इसे दुनिया का सबसे प्रमुख क्षेत्रीय समझौता माना जा रहा है, क्योंकि इसमें शामिल देशों में दुनिया की करीब आधी जनसंख्या रहती है. इन देशों की दुनिया के निर्यात में एक-चौथाई और दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 30 फीसदी योगदान है.

भारत को क्या हो सकता है फायदा

जानकारों का मानना है कि इस समझौते से भारत को एक विशाल बाजार हासिल हो जाएगा. घरेलू उद्योगों को यदि प्रतिस्पर्धी बनाया गया तो इसे दवा इंडस्ट्री, कॉटन यार्न, सर्विस इंडस्ट्री को अच्छा फायदा मिल सकता है.

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