दिल्ली: देश में जारी कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को यह साफ कर दिया है कि प्लाजमा थेरेपी से कोरोना वायरस के इलाज का अभी तक कोई पुख्ता सबूत नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया कि इसे लेकर सभी दावे गलत हैं और अभी भी हम एक्सपेरिमेंटल स्टेज पर ही हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि प्लाज्मा थेरेपी अभी भी प्रायोगिक है. जब तक इसे लेकर अभी तक कोई पुख्तास सबूत नहीं मिले हैं कि इसका ट्रीटमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि यह रोगी के लिए हानिकारक हो सकता है. कोरोना वायरस को लेकर अभी तक कोई अप्रूव थेरेपी नहीं है. प्लाज्मा थेरेपी को लेकर प्रयोग चल रहे हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि प्लापज्मार थेरेपी को अभी तक आईसीएमआर की ओर से अप्रूव नहीं किया गया है. आईसीएमआर ने केवल इसे ट्रायल और रिसर्च के तौर पर आजमाने के लिए कहा है. अमेरिका में भी इसे अभी एक्स पेरिमेंट के रूप में ही लिया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि ICMR ने कोविड-19 के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी की प्रभावकारिता का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन शुरू किया है. जब तक यह अध्ययन पूरा नहीं हो जाता तब तक आईसीएमआर प्लारज्माज थेरेपी को मंजूरी नहीं देगा.
इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ठीक हुए नए लोगों की संख्या के साथ ही हमारा रिकवरी रेट 23.3 फीसदी हो चुका है, जो बहुत ही प्रगतिशील बढ़ोत्तरी है.
उन्होंने कहा कि आज देश में 17 ऐसे जिले हैं, जहां पहले कोरोना वायरस के केस सामने आए थे लेकिन पिछले 28 दिनों से कोई केस सामने नहीं आया है. इनमें दो जिले जुड़े हैं और एक ज़िला कम हुआ है. जुड़ने वाले जिलों में पश्चिम बंगाल का कलिम्पोंग और केरल का वायनाड है जबकि बिहार का लखीसराय जिला इस सूची से बाहर हुआ है यहां एक नया केस मिला है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना के मरीजों को आरोग्य सेतु ऐप को डाउनलोड करना जरूरी है. मरीज ट्रिपल लेयर मास्कर का उपयोग करें.
गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि सूरत में प्रवासी मजदूरों के लिए NGO, प्रशासन और इंडस्ट्रीज़ ने मिलकर खाने के पैकेट्स और राशन किट्स का इंतजाम किया. IMCT ने प्रशासन को श्रमिकों को कोरोना की जानकारी उन्हीं की भाषा में देने का सुझाव दिया है.
गृह मंत्रालय ने बताया कि आईएमसीटी टीमें सूरत और अहमदाबाद गईं जहां उन्होंने पाया कि सूरत में प्रशासन आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करके मामलों के बारे में जानकारी ले रही है. प्रशासन तेजी से टेस्ट कर रहा है. गृह मंत्रालय ने बताया कि अहमदाबाद के एक गांव में ग्राम योद्धा टीम बनाई गई है. जो लोगों के घरों तक जरूरी सामान पहुंचाती है. इसके साथ ही सभी से सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन कराती है.

