उत्तर प्रदेश: कोरोना वायरस संकट से जारी लॉकडाउन में आम नागरिक जहां दिक्कतों से जूझ रहा है. वहीं अवैध कारोबार करने वालों की बल्ले बल्ले है. इन दिनों पशु तस्करी का पनाहगाह के रूप में कुलकुला स्थान जंगल हो गया है. जिसकी चर्चा आम हो रही है. जिसपर नकेल कसने के प्रशासन की कोशिशों पर ये चालाक तस्कर पानी फेर रहे हैं.
पशु तस्करों ने तस्करी के नए रास्ते तलाश लिए है. एक तो जनपद सीमा व दूसरी कई थानों की सीमा उनके लिए मददगार साबित हो रही है. हाइवे से होकर इन दिनों इन तस्करों का निकलना मुश्किल हो गया है. अपने धंधे को लेकर ये ग्रामीण रास्तों का उपयोग कर रहे हैं. अभी हाल ही में पशु तस्करों द्वारा डीसीएम से लादकर कर बैलों को ले जाने की सूचना मिली. बताया जाता है कि उक्त सूचना भाजपा कार्यकर्ताओं ने कुशीनगर विधायक को दी. जानकारी होते पहुंची पुलिस की भनक लगते पशु तस्कर पुलिस को धता बताते हुए भाग निकले, जबकि मौके से मिले दो बैलों को पशु गृह भेजा गया.
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कुछ तस्करों की गाड़ी कुलकुल स्थान के जंगल में आकर लगी. सूत्र बताते हैं कि कुछ तस्करों व गौवंशी पशुओं से लदा डीसीएम ट्रक देवरिया जनपद के तरकुलवा थाना क्षेत्र में गुरुवार की पूरी रात खड़ी रही. जिसकी सूचना भाजपा, सपा के नेता व कई गांव के ग्रामप्रधानों ने तरकुलवा पुलिस को दी लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाई नहीं की.
शुक्रवार की सुबह में ग्रामीण रास्तों से तस्कर व डीसीएम कसया थाना क्षेत्र के कुलकुला स्थान के जंगल में पहुंच गए. जैसे ही इसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई, ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस के बजाए भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं को दिया. कार्यकर्ताओं ने कुशीनगर विधायक को इसकी जानकारी दी. बताया जा रहा है कि विधायक ने पशु तस्करी की जानकारी आलाधिकारियों को दी. जिसके बाद पुलिस हरकत में आ गई.
पुलिस के पहुंचते ही दो बैलों को छोड़कर अपनी गाड़ी के साथ तस्कर फरार हो गए. पुलिस को मौके से जंगल मे बांधे हुए दो बैल बरामद हुए. जिसे पशु आश्रय केन्द्र को सौंप दिया गया. सूत्र बताते हैं कि तस्कर बिहार व देवरिया जनपद के थे. दो डीसीएम पर 20 गौवंशी पशुओं को लादकर बिहार ले जाने का कार्य जंगल मे चल रहा था. इसी दौरान पुलिस को भनक लग गई और आनन फानन में पशु तस्कर दो बैलों (साढ़) को छोड़कर फरार हो गए. लॉक डाउन में जारी बंदी में नियमानुसार प्रतिष्ठान व दुकानें खुलने के आदेश हैं किंतु जारी अवैध धंधों पर प्रतिबंध के बावजूद तस्कर अपना काम बखूबी निबटा रहे है जो कई सवाल खड़े करता है.

