रांची: झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने महगामा विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई करने की मांग की है. इस बाबत डीजीपी को पत्र लिखा है. एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर लॉकडाउन खत्म होने के बाद राज्यस्तरीय बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा.
घटना को लेकर एसोसिएशन के केंन्द्रीय कार्यालय में प्रांतीय अध्यक्ष योगेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में एक आपात बैठक हुई. इसमें महामंत्री अक्षय कुमार राम, उपाध्यक्ष अखिलेश्वर पाण्डेय, संयुक्त सचिव मो महताब आलम और संगठन सचिव अंजनी कुमार शामिल हुए. इस बैठक में गोड्डा की महगामा विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह द्वारा धरना देकर हंगामा करने, महगामा थाना प्रभारी को निलंबित कराने और अन्य पुलिसकर्मियों को धमकाने पर चर्चा की गई.
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चर्चा में यह बात सामने आई कि विधायक अपने क्षेत्र के सभी थाना प्रभारियों को आए दिन धमकाते रहती हैं. सभी के कार्यों में हस्तक्षेप करती है. पैरवी नहीं सुनने पर निलंबित कराने की धमकी दी जाती है. इस संबंध में थाना प्रभारी ठाकुर गंगटी, थाना प्रभारी बलबडडा, थाना प्रभारी मेहरमा, थाना प्रभारी हनवारा द्वारा अलग-अलग आवेदन दिया गया है कि लॉकडाउन की अवधि में लगातार विधायक और उनके कार्यकर्ताओ द्वारा लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाता है. मना करने पर सस्पेंड कराने का धमकी दी जाती है. थाना कार्यों में भी अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर दबाव बनाया जाता है.
इससे सभी पुलिसकर्मियों का मनोबल एवं मान-सम्मान काफी गिर गया है. स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं. उपरोक्त सभी थाना प्रभारी और थानों में पदस्थापित सभी कनीय पदाधिकारी एवं कर्मियों द्वारा विधायक के व्यवहार से पुलिसकर्मियों की भावना आहत हुई है. मनोबल भी काफी गिरा हुआ है. सभी पुलिसकर्मी क्षुब्धं होकर महगामा विधानसभा से अन्यत्र जगह स्थानान्तरण किये जाने का अनुरोध भी पुलिस अधीक्षक से किए हैं.
थाना प्रभारी महगामा ने 23 अप्रैल को एक लिखित शिकायत की है कि 22 अप्रैल की रात 9 बजे विधायक थाना पर अपने 40-50 समर्थकों के साथ आयी. एक निजी चैनल के मुख्य संपादक के विरूद्ध कांड दर्ज करने की मांग की. थाना प्रभारी ने बताया कि चूंकि मामला मुंबई का है, अतः वरीय पुलिस पदाधिकारियों से विचार-विमर्श कर ही कांड दर्ज किया जाएगा.
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पुलिस अधीक्षक से तत्कालिन थाना प्रभारी द्वारा इस संबंध में परामर्श लिया जा ही रहा था, इस बीच वह गुस्सा होकर अपने समर्थकों के साथ थाना परिसर में ही धरना पर बैठ गई. उन्होंने पूरी घटना की जानकारी पुलिस अधीक्षक को दी. कुछ घंटो बाद पुलिस अधीक्षक स्वयं महगामा थाना आए. तकनीकी बातों को बताते हुए उन्हें समझाने का प्रयत्न किए, परन्तु नहीं मानने पर अंततः कांड दर्ज कराया गया. हालांकि विधायक निलंबन की कार्रवाई पर अड़ी रही. अंत में पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना प्रभारी महगामा को भी निलंबित कर दिया गया, तब वे धरने से उठी.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन की मांग
महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक एवं प्रधान सचिव, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को पत्र लिखकर यह मांग की है कि महगामा विधायक के विरुद्ध उनके कार्यो के उच्चस्तरीय जांच की जाये. विधि-सम्मत कार्रवाई की जाए.
विधानसभा अध्यक्ष से मांग की गई कि उनके कार्यों की जांच कर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाये, ताकि संवैधानिक सस्थानों की गरिमा बनी रहे.
विधायक द्वारा लॉकडाउन के दौरान विधि विरुद्ध जमाव कर धरना देना संज्ञेय अपराध है. इसके लिए उनके विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जाए.

