तुपुदाना: रांची पुलिस का काम करने का तरीका अनोखा है. ऐसे तो थानों का गठन लोगों की समस्या सुनने और विधि व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए हुआ है लेकिन हटिया इलाके की पुलिस अपने हिसाब से थाने चलाते हैं. वरीय अधिकारियों तक केस न पहुंचे इसलिए घटना का केस ही नहीं दर्ज करते. न दर्ज होगा केस ना ही करना पड़ेगा छानबीन. थानों की ऐसी कार्यशैली देश में यदा-कदा ही सुनने को मिलते हैं. खरसीदाग के बसारगढ़ रोड नंबर छह में संयुक्त सचिव से सेवानिवृत शंभू नाथ शर्मा बीते 28 जनवरी को परिवार के साथ अपनी सास के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने जमशेदपुर गए थे. 30 जनवरी को वापस लौटे तो घर का ताला टूटा हुआ मिला.
अंदर जाने पर देखा कि आलमीरा का लॉकर टूटा हुआ है. लॉकर में रखे पांच लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और एलइडी टीवी गायब मिले. इसके बाद से आज तक शंभू नाथ शर्मा जगन्नाथपुर, खरसीदाग और तुपुदाना थाना का चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पायी है. हद तब हो गई जब रविवार को खरसीदाग थाना पुलिस शंभू नाथ शर्मा के घर आये घर का कागजात दिखाने को कहा ताकि यह पता चल सके कि आखिरकार इलाका है किसका.
पार्षद ने जब इलाका खरसीदाग थाने का बताया तो थानेदार ने कहा, हम मुखिया से लिखवा लेंगे इलाका उनका नहीं सीमा विवाद के कारण दो थाने ही आमने-सामने नहीं हैं बल्कि क्षेत्र के वार्ड 53 की वार्ड पार्षद निर्मला कच्छप भी यह लिख कर दे चुकी है कि बसारगढ़ रोड नंबर छह का इलाका खरसीदाग ओपी क्षेत्र में पड़ता है. वहीं, वार्ड पार्षद की चिट्ठी लेकर शंभू नाथ शर्मा जब खरसीदाग ओपी पहुंचे तो थानेदार बैद्यनाथ कुमार ने यह कहा कि कोई बात नहीं हम भी मुखिया से लिखवा कर दे देते हैं कि ये इलाका तुपुदाना में पड़ता है. हालांकि, इलाका जिसका हो सीमा के इस पेंच में भुक्तभोगी पिस रहे हैं.

