रांची: झारखंड के वैसे नक्सली जो पांच करोड़ के इनामी हैं, वो अब भी पुलिस के गिरफ्त से बाहर हैं. इन इनामी नक्सलियों को पुलिस आज तक नहीं ढूंढ पाई है.
जिन नक्सलियों पर सरकार ने पांच करोड़ के इनाम रखा है वो सभी कुख्यात हैं. इसकी लंबी फेरिस्तल है. इनमें भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्यं प्रशांत बोस उर्फ किशन दा उर्फ मनीष है. इनका संबंध बंगाल से है.
वहीं, मिसिर बेसरा उर्फ भाष्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर मूलत: गिरिडीह का रहने वाला है. इसके अलावा असीम मंडल उर्फ आकाश, उर्फ तिमिर भी पं. बंगाल के मिदनापुर का रहने वाला है.
वहीं, प्रयाग मांझी उर्फ विवेक उर्फ फुचना उर्फ करण दा धनबाद के टुंडी का रहने वाला है. इसके अलावा अनिल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश भी गिरिडीह का रहने वाला है. ये सभी आज तक नहीं पकड़ में नहीं आ सके हैं.
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 की आइबी की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में कुल 17 नक्सल संगठन सक्रिय है.
झारखंड के 18 जिले हैं नक्सलल प्रभावित:
झारखंड देश के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित राज्यों में से एक है. झारखंड के 24 जिलों में से 18 जिले नक्सल प्रभावित हैं. इनमें गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पलामू, लातेहार, गढ़वा, चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां शामिल है.
13 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं:
झारखंड के 13 जिले अति प्रभावितों की सूची में है. देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में से 13 जिले झारखंड के हैं. इसमें हजारीबाग, लोहरदगा, पलामू, चतरा, गढ़वा, रांची, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, गिरिडीह, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, सरायकेला – खरसावां, पुर्वी सिंहभूम, धनबाद, कोडरमा और रामगढ़ शामिल हैं. वहीं 8 जिले छत्तीसगढ़ के हैं.

