BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

पीड़ित महिलाओं का केस दर्ज नहीं करने पर थानेदार पर होगी कार्रवाई

by bnnbharat.com
February 12, 2020
in समाचार
पीड़ित महिलाओं का केस दर्ज नहीं करने पर थानेदार पर होगी कार्रवाई

पीड़ित महिलाओं का केस दर्ज नहीं करने पर थानेदार पर होगी कार्रवाई

Share on FacebookShare on Twitter

रांची: झारखंड पुलिस की ओर से एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर थाना पहुंची पीड़िता का केस दर्ज नहीं करने पर थानेदार पर कार्रवाई होगी.

झारखंड राज्य पुलिस मुख्यालय की ओर से यौन अपराध से जुड़े मामले को लेकर नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत महिलाओं से जुड़े मामलों को बगैर कार्रवाई सीधे महिला थाना भेजने पर थानेदार के खिलाफ सीआरपीसी 166ए के तहत कार्रवाई होगी और ऐसे मामले में 2 साल तक की सजा भी हो सकती है.

पुलिस महानिदेशक कमल नयन चौबे के द्वारा जारी आदेश पत्र में जिक्र है कि थाना में पदस्थापित पदाधिकारियों के द्वारा यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं का कांड दर्ज नहीं कर पीड़ित महिला को महिला थाना जाने को कह दिया जाता है. अब ऐसा ऐसा हुआ तो थानेदारों पर सीआरपीसी की धारा 166 ए के तहत कार्रवाई होगी.

एसपी स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि 166ए के तहत चिन्हित पदाधिकारी पर कार्रवाई करें, ताकि उन्हें छह माह से दो साल की सजा व जुर्माना लगाया जा सके.

सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि यौन अपराध से पीड़ित महिला राज्य के किसी भी थाने में संपर्क करती है तो किसी भी परिस्थिति में उसकी एफआईआर दर्ज करने से इंकार नहीं किया जाना चाहिए. यदि मामले थाना क्षेत्र के बाहर का हो तब जीरो एफआईआर दर्ज कर प्रारंभिक अनुसंधान करें, इसके बाद संबंधित थाने में एफआईआर की कॉपी भेजें.

यौन अपराध से जुड़े मामलों में केस दर्ज होने के बाद दो माह के भीतर पुलिस को केस का अनुसंधान पूरा करना होगा. पुलिस मुख्यालय के आदेश में इस डेडलाइन को तय किया गया है. पीड़िताओं को मुआवजा देने में भी पुलिस पदाधिकारी को मदद करनी होगी. केस के अनुसंधानकों की जिम्मेदारी तय कि गई है कि वह लोक अभियोजक के माध्यम से यह अनुरोध कराएं कि यौन अपराध से जुड़े मामलों के विचारण में पीठासीन न्यायधीश स्त्री हों. थाना के स्तर पर महिला का बयान दर्ज करने के लिए भी महिला पदाधिकारी की अनिवार्यता तय की गई है.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

देह व्यापार का भंडाफोड़, महिला सेक्स वर्कर समेत कई हिरासत में

Next Post

कचरे से सीएनजी व फर्टिलाइजर होगा तैयार, MOU जल्द

Next Post
कचरे से सीएनजी व फर्टिलाइजर होगा तैयार, MOU जल्द

कचरे से सीएनजी व फर्टिलाइजर होगा तैयार, MOU जल्द

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d