जमशेदपुर: पूरे देश में जहा केंद्र सरकार कोरोना वायरस को लेकर कितनी चिंता कर रही है वह जानकारी लोगों को अखबार और न्यूज चैनल के द्वारा मिलती है.
वहीं राज्य सरकार का हाल जानने के लिए हम ले चलते है झारखंड और उड़ीसा के बॉर्डर इलाका. वहां हाल देख कर हालात पिछल गई.
आपको बता दें कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए झारखंड और उड़ीसा के बॉर्डर पर ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों के पास ना तो मास्क है ना ग्लव्स ना ही सैनिटाइजर या किसी तरह की कोई जांच का कीट है.
लोग रजिस्टर में नाम दर्ज कर आना-जाना कर रहे है. वहीँ झारखंड पोस्ट पर यूं तो हेल्प डेस्क बनाया गया है लेकिन वह सिर्फ नाम मात्र का है.
जांच के नाम पर एक मैनुअल थर्मामीटर दिया गया है. मैनुअल थर्मामीटर के कारण अब तक पोस्ट से पार हुए 500 से अधिक यात्रियों में से एक की भी जांच नहीं की गई.
उधर, उड़ीसा के तिरिंग चेक पोस्ट पर चार पुलिसकर्मी जिसमें सिर्फ दो के पास मास्क वो भी खुद का खरीदा हुआ है.
पुलिसकर्मियों का कहना है कि हमने इसकी शिकायत अपने वरीय पुलिस अधिकारी और पुलिस एसोसिएशन को दी है लेकिन अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है.
अपनी जान पर खेलकर हम अपने ड्यूटी निभा रहे हैं. उधर, वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने पुलिसकर्मियों का परेशानी देख सैनिटाइजर लेकर सबका हाथ धुलाते नजर आ रहे है.

उधर, झारखंड पोस्ट का भी हाल उड़ीसा पोस्ट से कुछ कम नहीं है. यहां भी सरकार सिर्फ खानापूर्ति कर अपना धर्म निभा रही है.
इन लोगों का कहना है कि हेल्पडेस्क के नाम पर एक मैनुअल थर्मामीटर, सैनिटाइजर और एक रजिस्टर दिया गया है.
उधर, कोई व्यक्ति को उड़ीसा से झारखंड प्रवेश करना हो तो रजिस्टार में नाम दर्ज करा कर सैनिटाइजर से हाथ धो कर प्रवेश कर सकते हैं.
आपको बता दें कि देश में 21 दिन लॉकडाउन के आज 10 दिन बीत चुकी है. लेकिन झारखंड और ओड़िसा के बॉडर तिरिंग चेक पोस्ट कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है.
क्योंकि यह रास्ता भुनेश्वर के हवाई अड्डे को जमशेदपुर से जोड़ता है. वहीं रजिस्टर में यात्रियों का विवरण देखकर पता चलता है कि लगभग 500 से ऊपर लोग उड़ीसा से झारखंड में प्रवेश किए हैं.
इस रजिस्टर के अनुसार, ऐसे में जिस तरह से उड़ीसा सरकार और झारखंड सरकार या कहें कि दोनों सरकार की उदासीनता का जीता जागता उदाहरण है तिरिंग पोस्ट.

