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पर्यावरण केंद्रित विकास के लिए राजनैतिक परिवर्तन की जरुरत: के.एन गोविंदाचार्य

by bnnbharat.com
February 2, 2020
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पर्यावरण केंद्रित विकास के लिए राजनैतिक परिवर्तन की जरुरत: के.एन गोविंदाचार्य

पर्यावरण केंद्रित विकास के लिए राजनैतिक परिवर्तन की जरुरत: के.एन गोविंदाचार्य

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रांची: प्रख्यात विचारक के.एन गोविंदाचार्य ने कहा है कि पिछले कई महीनों से ऑस्ट्रेलिया में लगी आग के कारण कई करोड़ पशु पक्षी मारे गए है. समुंद्र का जल स्तर बढ़ रहा है. विकास के नाम पर भारत के 90 हजार गांव को शहरों में लीन करा लिया गया है. आज असमय वर्षा के कारण कृषि पंचाग अस्त व्यस्त हो गया है. वे रविवार को रांची में युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन के तत्वावधान में एक दिवसीय गोष्ठी – इको सेंट्रिक डेवलपमेंट (पर्यावरण केंद्रित विकास) विषय पर अपने विचार रख रहे थे.

गोविंदाचार्य ने कहा कि पिछले 5,000 वर्षों में जितना बदलाव प्रकृति में आया है उतना बदलाव पिछले 500 वर्ष में आया है और उतना ही बदलाव पिछले 50 वर्षों में आया है. टेक्नोलॉजी ड्रिवन सोसायटी से फॉसिल ऑयल का उपयोग बढ़ गया है और नड गोवंश बेकार हो गया है. समाज में तनाव बढ़ने का मुख्य कारण सुख कि कल्पना सुविधा से करने से हो रही है. गोविंदाचार्य ने कहा कि 50 वर्ष पूर्व विश्व का 70% सम्पत्ति 30% जनसंख्या के पास थी. आज 80% सम्पत्ति 20% जनसंख्या के पास है. भारत में 57% संपदा मात्र 1% आबादी के पास है.

गोविंदाचार्य ने आश्चर्य व्यक्त किया कि गूगल का भारत में हर वर्ष का कुल कारोबार होता है 4 लाख 29 हजार करोड़ पर वो टैक्स देता है सिर्फ 7000 करोड़ पर. आज साइबर वार कि वजह से कई देश की संप्रभुता खतरे में है. गोविंदाचार्य ने कहा कि एफडीआई आने पर भी अर्थव्यवस्था कि हालात ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि 500 वर्ष पहले कहा जाता था कि मनुष्य सबसे पराक्रमी है. पिछले 50 वर्ष में भारत का 60 प्रतिशत जैव विविधता का नुकसान हुआ है. आज पर्यावरण केंद्रित विकास के लिए राजनैतिक परिवर्तन की जरुरत है.

मुख्य अतिथि विधायक सी पी सिंह ने कहा कि पूरा विश्व पर्यावरण के लिए चिंतित है लेकिन असरदार पहल की अभी भी कहीं न कहीं कमी है. प्रतेक दिन हर व्यक्ति पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है. सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है. सिंह ने कहा कि स्वभाव में बदलाव लाने से ही पर्यावरण में बदलाव संभव है. उन्होंने उधारण देते हुए कहा कि सड़क बनने के लिए पेड़ काटे जाते है. नियम कहता है कि पेड़ को काटने पर पेड़ को लगाना भी पड़ता है और उसका संघरक्षण भी करना पड़ता है. लेकिन ऐसा नहीं होता है.

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विधायक सरयू राय ने कहा कि दामोदर 95 प्रतिशत प्रदूषण मुक्त हो चुकी है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रदूषण कर रहे संघटनो पर कार्रवाई कर रहा है. राय ने कहा कि दामोदर बचाओ आंदोलन की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में बी टी पी एस, सी टी पी एस पर एक एक करोड़ का जुर्माना लगाया है. उन्होंने ऐलान किया कि मई के महीने में युगांतर भारती पर्यावरण मेला करवाएगी और दिसंबर में एक स्मारिका का विमोचन होगा जिसमें पर्यावरण के क्षेत्र में अन्य संस्था के काम के बारे में बताया जाएगा.

विशिष्ठ अतिथि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के डा. गोपाल शर्मा ने कहा कि अतिक्रमण की वजह से जल सकंट होता है. गंगा में पानी के आभाव के कारण नेशनल वॉटरवे 1 की योजना फेल कर गई है. स्पोंजी लेयर समाप्त हो गया है. युगांतर भारती के दो दशको के क्रियाकलापों के बारे में विस्तारपुर्वक युगांतर भारती सचिव आशीष शीतल ने बताया. विषय प्रवेश रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार डा. एम.के जमुआर ने किया. स्वागत भाषण युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रो. उदय कुमार ने दिया. कार्यक्रम में विवेकानंद झा द्वारा लिखित पुस्तक दा मेकिंग आफ नरेन्द्र मोदी एंड अनमेकिंग आफ जवाहरलाल नामक पुस्तक का विमोचन भी हुआ.

कार्यक्रम में सुरेन्द्र बिस्थ, जयनंदु, सूर्यमणि सिंह, ए के मिश्रा, उमेश दास, पवन कुमार, मुकेश कुमार, मुकेश सिंह, माधुरी सिन्हा, पुष्पा टोपनो, रेखा देवी, बजरंग कुमार, निरज कुमार, अंगद मुण्डा, ब्रिजनन्दन कुमार, पांडव महतो इत्यादि उपस्थित थे.

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