रांची: मसीही विश्वासियों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ पुनरुत्त्थान (ईस्टर) का पर्व मनाया. मसीही विश्वास के अनुसार, क्रूस मृत्यु के तीसरे दिन प्रभु यीशु के जी उठने को पुनरुत्थान कहा जाता है. यीशु की क्रूस मृत्यु और उनका जी उठना मसीही विश्वास का आधार है.
कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन के दौरान विश्वासी अपने घरों पर ही रहे जबकि विभिन्न चर्च के पुरोहितों ने ऑनलाइन प्रार्थना विधि संपन्न कराई. आर्चबिशप हाउस में हुए प्रार्थना की अगुवाई आर्चबिशप फेलिक्स टोप्पो ने की. जबकि ईस्टर का संदेश बिशप मस्कारेहंस ने दिया.
बिशप मास्कारेहंस ने बाइबल के वचनों के आलोक में प्रभु यीशु मसीह के जी उठने की घटनाओं का मर्म समझाया. उन्होंने कहा कि इस साल हम ईस्टर की प्रार्थना गिरजा घरों में नहीं बल्कि आर्चबिशप हाउस के चैपल में कर रहे हैं.
लॉकडाउन और महामारी की वजह से सभी अपने-अपने घरों में हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल आने लगा है कि प्रभु हमारी पीड़ा, हमारे दर्द को देख रहे हैं या नहीं?
बिशप ने कहा कि प्रभु आज के दिन हमें यह आश्वासन देता है कि वह हमारे लिए पुनर्जीवित हुआ है और हमारी जिंदगी आगे वही बढ़ाता है. यदि हम प्रभु की ओर देखते हैं तो हमारे अंदर साहस बढ़ेगा.
प्रभु बताता है कि मैं तुम लोगों के साथ हूं. आज हम पूरी कलीसिया, अपने देश और विश्व के लिए प्रार्थना करते हैं. सीएनआई छोटानागपुर डायसिस के विश्वासियों के लिए प्रार्थना की अगुवाई बिशप बीबी बास्के ने की.
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि प्रभु का जीवन, उनकी मृत्यु, उनको गाड़ा जाना और पुनरुत्थान मानव जीवन के लिए संदेश है. यीशु ही पुनरुत्थान का संदेश है. यीशु को ईश्वर ने मानव जाति को पाप से मुक्त करने के लिए भेजा था उसने इस काम को पूरा किया. यीशु ने संपूर्ण मानव जाति के पाप को अपने ऊपर लिया और मानव जाति का उद्धार किया.
इसके अलावा जीईएल चर्च, एनडब्ल्यजीईएल चर्च के विश्वासियों ने भी ऑनलाइन प्रार्थना में हिस्सा लिया.
कब्रिस्तानों में नहीं हुई प्रार्थना
हर साल ईस्टर पर कब्रिस्तान में विशेष प्रार्थना होती थी, इसमें प्रोटेस्टेंट चर्च के विश्वासी शामिल होते थे. इस वर्ष यह प्रार्थना नहीं हो सकी.

