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कोयले के कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी

कोयला कामगारों ने संयुक्त हड़ताल की चेतावनी दी

by bnnbharat.com
June 21, 2020
in Uncategorized
कोयले के कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी
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रांची: केंद्र सरकार ने कोयले के कमर्शियल माइनिंग (वाणिज्यिक खनन) का निर्णय लिया है. भारत सरकार के इस फैसले के खिलाफ झारखंड सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दाखिल कर नीलामी प्रक्रिया को चुनौती दी गयी है. नीलामी प्रक्रिया के खिलाफ गैर भाजपा दलों और श्रमिक संगठनों की ओर से बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है, वहीं बीजेपी का दावा का है कि कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया से रोजगार सृजन के अवसर बढ़ेंगे.

रोजगार सृजन व राजस्व बढ़ने का दावा

बीजेपी विधायक विरंची नारायण का कहना है कि कुछ दिन पहले तक झारखंड सरकार का भी यह मानना था कि कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से रोजगार के नये अवसर सृजन होंगे और सरकार के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी.

कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ जन आंदोलन

दूसरी तरफ जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन है,ऐसे समय में आनन-फानन में कोल ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया शुरू करने से लोगों में खासा आक्रोश है. राज्य सरकार इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय गयी है, लेकिन पार्टी जनआंदोलन की तैयारी कर रही है.

नीलामी प्रक्रिया से पहले राज्य को विश्वास में लें

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे ने खनन कार्य के लिए नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के पहले राज्य को भी विश्वास में लेना चाहिए था, लेकिन जब मुख्यमंत्री की ओर से पत्र लिखकर फिलहाल कोल ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया को स्थगित रखने का आग्रह किया गया, उसके बावजूद नीलामी प्रक्रिया शुरू करने से कई सवाल खड़े हुए है.

2 से 4 जुलाई तक कोयला क्षेत्र में संयुक्त हड़ताल की चेतावनी

इधर, कोयला क्षेत्र में सक्रिय श्रमिक संगठनों ने भी कर्मिशल माइनिंग के खिलाफ आगामी जुलाई महीने में 2 से 4 जुलाई तक तीन दिवसीय हड़ताल की चेतावनी दे दी है. सीटू के महासचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि कमर्शियल माइनिंग के खिलाफ हेमंत सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्णय स्वागत करते हुए कहा कि  जल जंगल जमीन और खनिज जैसी राष्ट्रीय संपदा को बचाने का  संघर्ष अब एक नए दौर मे पहुंच गया है . उन्होंने कहा कि कोयले के वाणिज्यिक खनन के बहाने केंद्र सरकार कृषि, वन, पर्यावरण सभी की जिम्मेवारी कार्पोरेट घरानों के हवाले कर रही है.

सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन भी नहीं हुआ

झारखण्ड सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट मे रिट पीटिशन दाखिल करते हुए एडवोकेट तापेश कुमार सिंह ने कोल ब्लाक की नीलामी को अवैध बताते हुए कहा है कि मिनरल ला -( एमेंडमेंट) एक्ट 2020, 14 मई को समाप्त हो चुका है.  साथ ही खनन के लिए इसका सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव का भी आकलन नही किया गया है. महामारी के इस कठिन दौर मे इस प्रकार का फैसला संकट को और घनीभूत करेगा.

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