रांची: भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर गृहस्थ लोगों द्वारा बुधवार को और साधु समाज द्वारा गुरुवार को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जायेगा. इसे लेकर कई घरों में तैयारियां शुरु कर दी गई है.
इस बार कोरोना संक्रामक को लेकर लोग सोशल डिस्टेंसिंग और सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए मनाया जाएगा. इस बार घर पर ही भजन कीर्तन कर भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव सादगी से मनाया जाएगा.
श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में भगवान के कई प्रकार के वस्त्र के अलावा साज-सज्जा के सामान और झूले की दुकानें ग्राहकों के लिए सज गई हैं. लेकिन बाजार में ग्राहक नदारत हैं.
जन्माष्टमी का प्रसाद बनाने के लिए बाजार में धनिया पाउडर, सिधाड़ा आटा, फाफर और साबुदाना की विशेष व्यवस्था ग्राहकों के लिए की गई है. इसके लिए कई दुकानदारों द्वारा वजन के हिसाब से पैकेट तैयार किया गया है.
बताया गया है कि इस वर्ष जन्माष्टमी मंगलवार 11 अगस्त सुबह नौ बजकर सात मिनट पर शुरू होकर बुधवार 12 अगस्त को दिन के 11.17 बजे तक रहेगी. ऐसे में मंगलवार को गृहस्थी लोग व्रत रखेंगे. जबकि सन्यासी और वैष्णव संप्रदाय के लोग बुधवार को व्रत रखेंगे.
कोरोना संक्रमण के लिहाज से इस वर्ष अधिकांश मंदिरों में बड़े आयोजन नहीं होंगे. पंडित प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. ऐसे में मंगलवार को धर्मनगरी के अधिकांश लोग व्रत रखेंगे. हरिद्वार में संन्यासियों की
संख्या भी अधिक है और वैष्णव संप्रदाय से जुड़े लोग भी है. ऐसे में हरिद्वार में दो दिन जन्माष्टमी की धूम रहेगी. लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इस बार जन्माष्टमी की रौनक कम जरूर रहेगी.
पंडित बताते हैं कि अष्टमी पर भगवान कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप की पूजा की जाती है. इस दिन भगवान के बालस्वरूप को पात्र में रखें. लड्डू गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्रान करवाएं. नए वस्त्र पहनाकर रोली और अक्षत से तिलक करें. फिर उनको माखन मिश्री का भोग लगाएं. ऐसा करने से मानव की मनोकामनाएं पूरी होती है.

