डोभा में मछली और बत्तख पालन के साथ 5 एकड़ में सिंचाई
जमशेदपुर: सोच सकारात्मक हो तो दुनिया का कोई भी कार्य असंभव नहीं है. कुछ ऐसा ही कर दिखाया है पोटका प्रखंड के हरिणा पंचायत अंतर्गत मागड़ु (चिरूगोड़ा) गांव के प्रगतिशील किसान गुमदी मुर्मू ने. किसान गुमदी मुर्मू ने कोरोनाकाल में सरकार की जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेते हुए अपने खेत में डोभा का निर्माण कराया. इस डोभा (तालाब) निर्माण की लागत करीब 29 हजार रुपये रही. पिछले वर्ष मई माह में मनरेगा के तहत डोभा निर्माण शुरू किया गया था जिसे जल्द ही पूरा भी कर लिया गया.
किसान गुमदी मुर्मू बताते हैं कि लॉकडाउन के समय में राज्य सरकार ने स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु कई योजनाओं की शुरूआत की थी जिसकी जानकारी जिला व प्रखंड प्रशासन द्वारा विभिन्न माध्यमों से मिलता रहता था. किसान गुमदी मुर्मू को स्वरोजगार हेतु अपने खेत में डोभा निर्माण कराना उचित लगा. इन्होंने कोरोनाकाल में अपने घर के समीप बनाये गये डोभा को न केवल बहुपयोगी बनाया, बल्कि उसमे लाखों का कारोबार शुरू किया, जिससे अमदनी भी मिलना शुरू हो गया है.
मछली- बत्तख पालन के साथ-साथ नवंबर से सब्जी की खेती शुरू किया
किसान गुमदी मुर्मू बताते हैं कि योजना के पूर्ण होते ही उन्होंने सबसे पहले डोभा में पानी भरकर मछली पालन शुरू किया, जिसके बाद बत्तख पालन तथा नवंबर महीने से 5 एकड़ जमीन में सब्जी व गन्ना की खेती कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि डोभा में 320 मछली का बीजा डाले थे जिसमें मछलियां फिलहाल एक-एक किलो की हो गई हैं, जबकि बत्तख के छोटे-छोटे बच्चे बड़े हो गये है. वहीं नंबवर से शुरू किये गये गन्ना, बैगन, टमाटर, आलु, धनिया, प्याज, सरसों, गोभी के खेत भी लहलहा रहे है, जिसमें वे अब तक छह हजार रुपये गन्ना से तथा लगभग 10 हजार रूपए सब्जी की खेती से आमदनी कर चुके हैं.
कोरोना काल में लोगों को काम भी मिला, अब आमदनी भी हो रही
हरिणा पंचायत की पूर्व मुखिया सरस्वती मुर्मू कहती हैं कि कोरोना काल में लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से राज्य सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे पोटो हो खेल मैदान, बिरसा हरित क्रांति, नीलांबर पीतांबर जल समृद्धि योजना और डोभा निर्माण को पंचायत एवं ग्राम स्तर पर धरातल पर उतारा जा रहा था.
इसी क्रम में किसान गुमदी मुर्मू ने डोभा निर्माण कराया था. डोभा निर्माण में एक तरफ स्थानीय मजदूरों को तो रोजगार मिला वहीं गुमदी मुर्मू द्वारा डोभा बनाने के बाद यहां मछली व बत्तख पालन तथा खेती कार्य शुरू किया गया, जो खेती अब सभी के सामने है. यह डोभा काफी लाभकारी साबित हो रहा है.

