नई दिल्ली:- मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में कतर में दस साल कैद की सजा पाने वाले मुंबई के एक दंपती को राहत प्रदान करते हुए कतर की शीर्ष अदालत ने उनकी सजा को खारिज कर दिया और मामले की समीक्षा का आदेश दिया.
कतर की अपीली अदालत ने पिछले महीने यह आदेश सुनाया. मोहम्मद शरीक (30) और उसकी पत्नी ओनिबा कुरैशी को जुलाई 2019 में दोहा में हमाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया और उनके बैग से 4.1 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया.
इसके बाद सुनवाई में अदालत ने दंपत्ति को दोषी ठहराया और तब से दोनों जेल में थे. कतर जाते समय कुरैशी गर्भवती थी और जेल में उसने एक बच्ची को जन्म दिया.
कतर जाते समय ओनिबा गर्भवती थी और जेल में उसने एक बच्ची को जन्म दिया था.
शीर्ष अदालत में दंपती की याचिका के मुताबिक शरीक की एक चाची ने कतर की उनकी यात्रा की व्यवस्था की थी और तंबाकू का एक बैग देकर कतर में एक दोस्त तक उसे पहुंचाने को कहा था, लेकिन इस बैग में तंबाकू नहीं प्रतिबंधित मादक पदार्थ था.
दंपती ने अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें पैकेट में रखी प्रतिबंधित सामग्री के बारे में नहीं पता था और उन्हें फंसाया गया. शीर्ष अदालत ने दंपती को दोषी ठहराए जाने के निचली अदालत के फैसले को दोषपूर्ण माना, क्योंकि बचाव में दी गई उनकी दलीलों का संज्ञान नहीं लिया गया.
आदेश में कहा गया, ”दंपती के साथ छल हुआ. यह आदेश दोषपूर्ण है.” अदालत ने मामले को अपीलीय अदालत में भेज दिया, जहां अब नई पीठ मामले पर सुनवाई करेगी.

