रांची: ये रघुवर सरकार की मार है. इसके कारण 58 हजार युवा बेजार हैं. वे सब कुछ होने के बाद भी नौकरी पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. लगातार आंदोलन कर रहे हैं. उन्हें लाठी-डंडे तक खाने पड़ रहे हैं. फिलहाल रांची के मोरहाबादी मैदान में अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं.
52 हजार जेटेट अभ्यर्थी-
आंदोलनरत करीब 52 हजार जेटेट पास अभ्यर्थी हैं. उनके मुताबिक इससे संबंधित परीक्षा 20 नवंबर, 2016 में ली गयी थी. परिणाम 11 मार्च, 2017 को प्रकाशित हुआ था. परीक्षा पास करने के चार साल बीत जाने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया एक बार भी शुरू नहीं की गई. इसके कारण अनेक विद्यार्थियों की उम्र सीमा भी खत्म हो गई है. कुछ की खत्म होने के कगार पर है.
अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के लगभग 23 हजार पद खाली हैं. खाली पदों पर उनकी नियुक्ति हो सकती है. इस मामले को लेकर वह कई बार मंत्री, विधायक, उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं. हर बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है.
प्रमुख मांगे-
- प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए.
- नियुक्ति प्रक्रिया 2020 तक के सभी रिक्त पदों पर हो.
- जेटेट-2016 उत्तीण विद्यार्थियों की नियुक्ति झारखंड प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 के तहत ही काउंसलिंग के माध्यम से की जाए.
- पिछली सरकार के द्वारा विलय किये गये सभी विद्यालयों को पुन: खोला जाए.
- जेटेट -2016 उत्तीण अभ्यर्थियों की नियुक्ति जेटीईटी आयोजन से पूर्व की जाए.
5 हजार पंचायत सचिव-
इंटरमीडिएट स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा के पंचायत सचिव पद के अभ्यर्थियों ने अविलंब फाइनल मेरिट लिस्ट जारी करने की मांग की है. कर्मचारी चयन आयोग ने वर्ष 2017 में 3088 पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी, जो अब तक लंबित है.
पंचायत सचिव के पद के लिए 7000 आवेदकों ने परीक्षा दी, जिसमें 4913 अभ्यर्थी पास हुए. 27 अगस्त से 31 अगस्त और 3 सितंबर से लेकर 7 सितंबर 2019 तक सफल अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन हो चुका है. इसके बाद भी आयोग ने फाइनल मेरिट लिस्ट जारी नहीं की है.
प्रमुख मांग-
- मेघा सूची जारी कर नियुक्ति की जाए.
1029 होम गार्ड जवान-
होमगार्ड के नव चयनित अभ्यर्थी का कहना है कि 2016 में ही उनकी बहाली की गई थी. सारी प्रक्रिया समाप्त हुए चार वर्ष बीत चुका है. वही अभी तक प्रशिक्षण नहीं मिला, जिसमें शहरी एवं ग्रामीण के अभ्यर्थी भी शामिल है. अभ्यर्थियों का कहना है कई बार मुख्यमंत्री के समक्ष भी समस्या को रखा गया. सिर्फ आश्वासन ही मिला है. काफी समय बीत जाने से हिम्मत टूट गई है.
प्रमुख मांग-
- नियुक्ति देकर ट्रेनिंग में भेज दिया जाए.

