नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की तीन नॉन टेक्निकल और पांच टेक्निकल रेलवे सेवाओं का विलय करके इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस बनाने का फैसला लिया है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने गुरुवार शाम को तीन घंटे तक वीडियो कांफ्रेस के जरिए ट्रैफिक, कर्मियों और अकाउंट सर्विस के अधिकारियों से विलय को लेकर बातचीत की. हालांकि वह उनके डर और असंतोष को खत्म करने में नाकाम रहे. पोस्टकार्ड के जरिए अधिकारियों ने विलय को एकतरफा निर्णय बताया जो नॉन-टेक्निकल रेलवे अधिकारियों द्वारा सिविल सेवाओं के माध्यम से शामिल किए गए उचित प्रतिनिधित्व के बिना लिया गया है.
उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि यदि विलय किया जाएगा तो उन्हें अपनी सेवा बदलने का विकल्प दिया जाए. जिसे लेकर नॉन-टेक्निकल अधिकारियों के बीच असंतोष है. अब उन्होंने फैसले के खिलाफ प्रधानमंत्री, कैबिनेट सचिव, रेलवे मंत्री, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के प्रतिनिधियों को पत्र लिखा है.
अधिकारियों का दावा है कि देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 10,000 पोस्टकार्ड भेजे गए हैं: वीडियो कांफ्रेस में हिस्सा लेने वाले अधिकारी ने कहा, ‘सीआरबी सभी रेलवे अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस में कैसे दावा कर सकते हैं कि ट्रैफिक अधिकारी कुछ नहीं करते हैं. वे किसी संपत्ति का रखरखाव नहीं करते हैं वे दुर्घटनाग्रस्त स्थानों पर नहीं जाते, न ही वे निरीक्षण करते हैं आदि. यह बहुत ही पक्षपातपूर्ण और विध्वंसकारी है. ‘
रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को आठ सेवाओं के विलय की घोषणा करते हुए, निर्णय को सर्वसम्मति कहा था. जिसे सात और आठ दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय चर्चा के दौरान सभी अधिकारियों के अत्यधिक समर्थन के साथ परिर्वतन संगोष्ठी में विभागवाद को समाप्त करने के उपायों पर काम करने के लिए लिया गया. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि संगोष्ठी में 12 टीमें शामिल थीं जिसका प्रतिनिधित्व इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज के महाप्रबंधकों ने किया था. यह महाप्रबंधक ट्रैफिक, अखाउंट्स और कर्मी के थे जो एक साथ मिलकर संगठन का प्रबंधकीय और प्रशासनिक आधार बनाते हैं.
रेलवे की आठ सेवाओं में से अकाउंट्स, कर्मी और ट्रैफिक अधिकारियों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के जरिए चुना जाता है, जिसके लिए नॉन टेक्निकल और मानविकी पृष्ठभूमि के लोग आवेदन कर सकते हैं। वहीं इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, स्टोर्स, मैकेनिकल, सिग्नलिंग और टेलिकॉम के अधिकारियों को इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज के जरिए चुना जाता है.

