नई दिल्ली: सियासत तेज होनो के लिए सिर्फ एक मुद्दे जरुरत होती है. और इस बार मुद्दा है रेलवे ट्रैक के किनारे बसीं झुग्गियां. इसे हटाने को लेकर सियासत तेज हो गई है. सभी दलों के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. विपक्ष लगातार प्रदेश सरकार से झुग्गी वासियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहा है. इसके अलावा विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी में है.
उधर, आप का कहना है कि किसी का घर उजड़ने नहीं देंगे. कांग्रेस अदालत से सड़क तक संघर्ष करने की बात कर रही है. इस सियासत में रेल प्रशासन भी उलझा हुआ है. रेलवे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ट्रैक किनारे बसीं झुग्गियां हटाई जाएंगी.
रेलवे ट्रैक किनारे बसे 48 हजार लोगों को बेघर करके उन्हें छत देना दिल्ली सरकार के लिए मुसीबत बन गई है. विपक्ष बार-बार दबाव बना रहा है कि दिल्ली सरकार झुग्गी वालों के रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करें. भाजपा ने चेतावनी दी है कि झुग्गियों को तोड़ा गया तो भाजपा दिल्ली सरकार की ओर से बनाए गए खाली मकानों में प्रभावितों को बसा देगी.
यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में अगर प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू किया जाता तो आज यह समस्या नहीं आती. कांग्रेस राजीव गांधी आवास योजना के तहत झुग्गी वालों को मकान दिलाने का वादा कर रही है. फिलहाल रेलवे के आला अफसर इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं.
रेलवे पुलिस बल भी फिलहाल झुग्गियों को हटाने के लिए हरकत में नहीं है. दरअसल जब भी रेलवे अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू करता है तो सियासत शुरू हो जाती है. धरने-प्रदर्शन शुरू हो जाते है. ऐसे में रेलवे फिलहाल दिल्ली सरकार के निर्णय के इंतजार में है. इसी तरह रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) को भी आदेश का इंतजार है.
यमुना किनारे बसी झुग्गियों पर वन विभाग ने की कार्रवाई
यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के पास यमुना खादर में कई वर्षों से बसी झुग्गियों को वन विभाग ने कार्रवाई कर शनिवार को गिरा दिया. कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के अलावा अर्द्धसैनिक बल भी तैनात रहा. इस दौरान 35.73 हेक्टेयर पर 80 झुग्गियों को हटाकर जमीन को खाली कराया गया. वहीं, झुग्गी निवासियों ने कार्रवाई को गलत बताते हुए विभाग पर जमीन को हड़पने का भी आरोप लगाया.
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 2018 में पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने क्षेत्र को विकसित करने के लिए वन विभाग को इस जमीन को सौंपा था. वहीं, यह जमीन पावर ग्रिड कॉरपोरेशन को डीडीए द्वारा दी गई थी. बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने इस जमीन को किराए पर देकर प्रति बीघा के हिसाब से 11 हजार रुपये कमा रहे थे.

