नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. इस आंदोलन को आज एक महीना पूरा हो गया है. कानूनों को रद्द करने की मांग के लेकर किसान बीते 26 नवंबर से लगातार सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं.
किसान और सरकार के बीच इस मुद्दे पर अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. इसी क्रम में शनिवार यानी आज किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. इस मीटिंग में आगे की रणनीति को लेकर चर्चा हो सकती है.
वहीं, महीने भर से प्रदर्शन कर रहे किसानों के कारण आम जन-मानस को और सार्वजनिक सेवाओं की क्षति हुई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, किसानों के आंदोलन से 2400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. किसानों के प्रदर्शन से ब्यास और अमृतसर के बीच रेलवे का एक पूरा हिस्सा लगभग महीना भर से बंद है.
रास्ते भी बंद हैं और रास्तों से आवाजाही बंद होने के कारण लम्बे रास्ते तय करने पड़ रहे हैं. ठीक यही हाल रेल गाड़ियों का है. गाड़ियों को तरणतारन होकर गुजारा जा रहा है. इसकी क्षमता भी कम है और यह रास्ता लंबा है जिस कारण कम ट्रेनें ही इस रास्ते से गुजर पा रही हैं.
इस अव्यवस्था के कारण रेलवे को करीब 2400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. किसान आंदोलन के कारण दो ट्रेनें रद्द हुई हैं और तीन को आधे रास्ते तक ही चलाया जा रहा है, वहीं सात ट्रेनें के मार्ग बदल दिए गए हैं. प्रदर्शन के कारण सिर्फ सामान्य गाड़ियां ही प्रभावित नहीं हुई है बल्कि मालगाड़ियों का परिचालन भी प्रभावित हुआ है. आंदोलन के कारण 24 सितंबर से 24 नवंबर तक पंजाब में किसानों के प्रदर्शन के चलते ट्रेन सेवाएं बंद थीं.
सरकार और किसान यूनियनों के बीच कृषि कानूनों को लेकर पांच दौर की बातचीत बेनतीजा रही है. यूनियन सितंबर में लागू किये गए इन कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अड़े हैं. प्रधानमंत्री पीएम-किसान योजना के तहत नौ करोड़ किसानों को 18,000 करोड़ रुपये का कोष जारी करने के बाद बोल रहे थे.

