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दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और राजस्थान की सरकार कर रही है सहयोग
रांची: झारखंड स्टेट बार कौंसिल के वाईस चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने भारत के विधि और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र भेजकर झारखंड के अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करने का आग्रह किया है.
शुक्ल जो अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के भी राष्ट्रीय महामंत्री है ने विधि और न्याय मंत्री को लिखा है कि 40 दिनों से झारखंड में न्यायालय बंद है, विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कुछ जरुरी सुनवाई होती है.
झारखंड में 35 हजार अधिवक्ता, सिविल कोर्ट, वाणिज्य कोर्ट सहित अन्य न्यायिक कोर्ट से जुड़े है, जो 40 दिनों से न्यायालय बंद रहने के कारण कठिनाई महसूस कर रहे है.
अधिवक्ताओं के पेशा सम्मानित पेशा है और अधिवक्ताओं का स्वतंत्रता संग्राम से लेकर अब तक स्वर्णिम इतिहास रहा है. बराबर अधिवक्ताओं की भूमिका राष्ट्र निर्माण में बढ़ चढ़कर रहती है और आज भी है. देश के सर्वोच्च पदों पर अधिकांश अधिवक्ता ही है.
शुक्ल ने विधि और न्याय मंत्री को लिखा है कि आप स्वयं भी एक सफल अधिवक्ता है और अधिवक्ताओं की कठिनाइयों से अवगत है. देश के अन्य राज्य दिल्ली, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु और मध्यप्रदेश में अधिवक्ताओं के लिए बजट में कल्याणकारी योजनाओं के लिए राशि दी जा रही है.
झारखंड में भी झारखंड स्टेट बार कौंसिल ने झारखंड की राज्यपाल मति द्रौपदी मुर्मू को और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस आशय का ज्ञापन कुछ महीने पूर्व सौंपा था, जो उनके विचाराधीन है. ऐसे में झारखंड के अधिवक्ता आपकी तरफ देख रहे है ताकि झारखण्ड में अधिवक्ताओं को आर्थिक पैकेज मिले, बजट में अधिवक्ताओ की कल्याणकारी योजनाओं के लिए राशि का प्रावधान हो और अन्य चिकित्सीय सुविधा भी मिले.
शुक्ल ने लिखा है कि पूरे देश के साथ झारखंड के भी अधिवक्ता इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में केन्द्र सरकार और झारखंड सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे है तथा लोंगो को जागरूक करने और उनको हर संभव सहयोग भी कर रहे है.
शुक्ल ने विधि और न्याय मंत्री को लिखा है युवा अधिवक्ता आज काफी कठिनाई में है उनके लिए प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था भी केंद्र और राज्य सरकार को करनी चाहिए, ताकि उनका मनोबल ऊंचा हो और वे कानूनी क्षेत्र में झारखंड का नाम पूरे भारत में ऊंचा कर सके.
शुक्ल ने विधि और न्याय मंत्री से युवा अधिवक्ताओ को 20, 20 हजार रुपये प्रति महीना प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था सुलभ कराने का भी आग्रह किया है.

