दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार (15 मई) को एक ऐसी योजना को मंजूरी दी जिसके तहत घरेलू रक्षा उद्योग द्वारा देश में विकसित और निर्मित सैन्य हार्डवेयर (उपकरणों) के परीक्षण के लिए 400 करोड़ रुपए की लागत से केन्द्र तैयार किए जाएंगे.
अधिकारियों ने बताया कि ‘रक्षा उपकरण परीक्षण योजना’ (डीटीआईएस) का लक्ष्य देश में रक्षा एवं हवाई क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ावा देना है.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ”रक्षा मंत्रालय ने 400 करोड़ रुपए के शुरुआती बजट के साथ डीटीआईएस को मंजूरी दे दी है जिसके तहत रक्षा क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक ढांचा/परिसर विकसित किए जाएंगे.”
बयान के अनुसार, यह योजना पांच साल की अवधि के लिए है और इस दौरान निजी उद्योगों की साझेदारी से छह से आठ नये परीक्षण केन्द्र स्थापित किए जाएंगे.
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते 11 मई को कहा था कि उनका मंत्रालय सीमाओं पर दिखाई देने वाले या कोरोना वायरस जैसे अदृश्य शत्रुओं, सभी को नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने एक ऑनलाइन कांफ्रेंस में कहा कि भारत को सैन्य निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना चाहिए और सरकार एक नीतिगत खाका लाकर घरेलू रक्षा उद्योग का समर्थन कर रही है.
बयान के मुताबिक, इन योजनाओं के लिए सरकार अनुदान के रुप में 75 प्रतिशत की राशि देगी और बाकि 25 प्रतिशत लागत निजी उद्योगों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होगी. वर्तमान में भारत दुनिया के सबसे बड़े सैन्य उपकरण आयातकों में शामिल है. सरकार देश को रक्षा उत्पादन का बड़ा केन्द्र बनाने पर ध्यान दे रही है.
कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि सरकार ने नए लक्ष्य तय किए हैं और रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण हासिल करने के लिए ”सही नीति” खाका तैयार की है.
उन्होंने कहा था, ”हमें हमेशा यह ध्यान रखना है कि स्वदेशी तकनीक और स्वदेशी निर्माण का कोई विकल्प नहीं है. हम वास्तव में तभी आत्मनिर्भर होंगे जब भारत प्रौद्योगिकी के आयातकर्ता के बजाय निर्यातक बनने में सफल होगा.”

