ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा
रांची: भाई बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार सोमवार 3 अगस्त को मनाया जाएगा. पुराणों में विदित है इस पर्व का शुभ मुहूर्त का बहुत ही विशेष महत्व है. शुभ घड़ी में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने से भाग्य उदय होता है. साथ ही रिश्तो में मधुरता प्राप्ति होती है तो आइए जानते हैं इस वर्ष का राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है.
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार 2 अगस्त रात्रि 9:31 से भद्रा प्रारंभ होकर 3 अगस्त सोमवार प्रातः काल 9:28 तक विराजमान रहेगी. इसी समय में प्रातः 7:30 से 9:00 तक राहु काल भी उपस्थित रहेगा अतः यह काल निषेध रहकर अशुभ होगा यहां यह भी जानना आवश्यक है कि
भद्राकाल निषेध क्यों होता है ?
शास्त्रों के अनुसार शनि की बहन का नाम भद्रा है एक बार ब्रह्मा जी ने किसी कारण से भद्रा को श्राप दिया कि तुम्हारे गोचर काल में किया गया शुभ मांगलिक कार्य सफल नहीं होगा बल्कि कष्ट का दुख कारण बनेगा अतः भद्रा का निषेध ही सर्वश्रेष्ठ रहता है.
इस कारण से रक्षा सूत्र का शुभ समय प्रातः काल 9:28 से रात्रि काल 9:27 तक यंत्र शुभकारी रहेगा क्योंकि पूर्णिमा रात्रि 9:27 पर ही रहेगी उपरांत भाद्रपद मास की प्रथमा तिथि होगी जो कि रिक्त है जोकि शुभकारी नहीं होती है उक्त अवधि में भी प्रातः काल 11:10 से 12:56 तक का समय अत्यंत शुभ कारी है सुखद यह है 29 वर्ष के बाद एक अच्छा विशेष सहयोग बन रहा है श्रावण मास का पांचवां और आखिरी सोमवार जहां इस को खास बना रहा है जिसके साथ में सर्वार्थ सिद्धि योग, आयुष्मान योग, प्रीति योग, पूर्णिमा, चंद्रमा का मकर में होना ,एवं सम सप्तक सूर्य व शनि, का होना इसके लिए बहुत ही मंगलकारी सिद्ध होगा रक्षा सूत्र किस प्रकार का होना चाहिए.
शास्त्रों के अनुसार रक्षा सूत्र तीन धागों का होना चाहिए लाल पीला और सफेद अन्यथा की स्थिति में लाल और पीला तो होना ही चाहिए रक्षा सूत्र में चंदन लगा हो तो बेहद शुभ होता है और यदि कुछ भी ना हो तो पूजन का कलावा सर्वश्रेष्ठ मानकर श्रद्धा पूर्वक बांधना चाहिए.

कैसे मनाना चाहिए रक्षाबंधन
एक थाली में संभव हो तो शुद्ध धातु की उसमें रोली, चंदन, अक्षत, दही, रक्षा सूत्र और मिठाई रखें साथ में देसी घी का दीपक भी रखें पूजा का थाल तैयार करके सर्वप्रथम भगवान को समर्पित करें इसके उपरांत भाई को पूरब या उत्तर की तरफ मुंह करवा कर के बैठाए सर्वप्रथम भाई का तिलक करें फिर रक्षा सूत्र बांधने के उपरांत आरती करें फिर मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है रक्षा सूत्र बांधने के समय भाई-बहन का सिर खुला हुआ नहीं होना चाहिए तथा रक्षा सूत्र बांधने के उपरांत अपने माता पिता एवं गुरु का आशीर्वाद लें तत्पश्चात अपनी बहन को सामर्थ के अनुसार उपहार देना चाहिए उपहार भी ऐसा होना चाहिए जो दोनों के लिए मंगलकारी हो
विशेषकर काले वस्त्र तीखा भोजन या नमकीन इस समय में पहनना और खाना उचित नहीं रहता है इससे बचना चाहिए
रक्षा सूत्र कब खोलना चाहिए
शास्त्रों के अनुसार यदि चले तो रक्षा सूत्र कम से कम एक पक्ष तक इसे बांधे रखना चाहिए परंतु अगर अपने आप खुल जाए तो इसे सुरक्षित रख लेना चाहिए साथ में इसे बहते हुए जल अथवा शुद्ध मिट्टी में दबा देना चाहिए.

