रांची: एक दशक से चल रही जांच के बाद आखिरकार रांची विवि के तीन शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया. गुरुवार को विवि प्रशासन ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी. ये तीनों केसीबी कॉलेज बेड़ो के शिक्षक हैं. इनमें अंग्रेजी के उमेश नाथ तिवारी, अर्थशास्त्र के जमील अख्तर और गृह विज्ञान की प्रतिमा सिन्हा हैं. ये तीनों शिक्षक अंक में हेराफेरी कर व्याख्याता बनने में सफल हो गए थे.
बर्खास्तगी के बाद विवि प्रशासन अब इन पर एफआइआर की तैयारी कर रहा है. इधर तीनों शिक्षक तीन जून तक कार्यरत थे. इसलिए इन्हें तीन जून तक का वेतन मिलेगा. गौरतलब है कि सर्टिफकेट में हेराफेरी करने सहित अन्य तरीके से गड़बड़ी कर नियुक्ति मामले में मांडर कॉलेज के तीन शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं.
मामले को दबाने का खूब हुआ प्रयास
आरयू प्रशासन के पास करीब 2009 में यह मामला आया था कि तीनों शिक्षक अंकों में गड़बड़ी कर नियुक्त हुए थे. इसके बाद कई जांच कमेटी गठित की गई. वर्ष 2010 में भी तत्कालीन डीएसडब्ल्यू की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित हुई थी जिसने रिपोर्ट में बर्खास्तगी की बात कही थी. इसके बाद भी बर्खास्तगी को ले कई रिपोर्ट आई. लेकिन विवि प्रशासन इन्हें बचाने में लगा रहा.
18 दिसंबर 2019 को हुई सिंडिकेट की बैठक में भी तीनों के बर्खास्तगी की मुहर लगी लेकिन विवि प्रशासन ने टालमटोल का रवैया अपनाते हुए मामले को दबाने के लिए बर्खास्तगी से संबंधित फाइल जेपीएससी को भेजकर बर्खास्तगी के बारे में पूछा.
इस पर जेपीएससी ने कहा था कि जब उसने इन शिक्षकों की नियुक्त ही नहीं की है तो इस मामले में निर्णय भी नहीं दे सकता है. विवि प्रशासन निर्णय के लिए स्वतंत्र है. इसके बाद विवि ने मामले पर लीगल ओपिनियन मांगने की बात कही. इस पर भी 17 मार्च 2020 को रिपोर्ट आ गई कि कार्रवाई की जाए.
आखिरकार अब जालसाज शिक्षकों पर कार्रवाई का फैसला हुआ है. जालसाजी के तहत वर्षों तक नौकरी करने वाले और वेतन उठा कर चूना लगाने वाले इन शिक्षकों से वेतन की रिकवरी कैसे होती है यह देखने वाली बात होगी.

