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355 करोड़ की रांची शहरी जलापूर्ति फेज-1 का काम अब तक नहीं हुआ पूरा

by bnnbharat.com
October 5, 2019
in समाचार
355 करोड़ की रांची शहरी जलापूर्ति फेज-1 का काम अब तक नहीं हुआ पूरा

Ranchi Urban Water Supply Phase-1 work of 355 crores not completed yet

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ब्यूरो चीफ,

रांची: राजधानी रांची की शहरी जलापूर्ति योजना फेज-1 का काम नौ वर्षों में भी पूरा नहीं हो पाया है. 2010 में हैदराबाद की कंपनी आईवीआरसीएल का चयन इस योजना के लिए पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से ग्लोबल निविदा के आधार पर किया गया था. इस कंपनी को 280 करोड़ का काम मिला था. इसके लिए आईवीआरसीएल को अग्रिम की राशि समेत कुल 113 करोड़ से कुछ अधिक का भुगतान किया गया था. आईवीआरसीएल के कार्यकलापों से असंतुष्ट सरकार ने 2013 सितंबर में कंपनी को काली सूची में डालते हुए फिर से निविदा आमंत्रित की. बचे हुए कार्य की लागत का पुनरीक्षण कर 355 करोड़ कर दिया गया. 2014 के अंत में एलएनटी को कार्यादेश दिया गया. जिसमें बचे हुए 60 फीसदी से अधिक कार्य को मई 2017 तक पूरा करना था. अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है. इस बीच एलएनटी को पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से दो बार डेट एक्सटेंशन का लाभ भी दिया गया.

क्या-क्या होना था काम

एलएनटी को दिये गये काम में 110 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) की क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, डेड स्टोरेज का काम, पुनदाग, अरगोड़ा, 56 सेट डोरंडा, ललगुटुवा, सिंह मोड़ समेत छह जगहों पर ओवरहेड टैंक के बचे हुए काम को पूरा करना था. योजना में 330 किलोमीटर से अधिक दूरी तक जलापूर्ति पाइपलाइन (30 इंच व्यास से लेकर 8 इंच व्यास वाले पाइप) को भी बिछाने का काम करना था. साथ ही साथ सिंहमोड़, हटिया, निफ्ट कॉलोनी, पुनदाग, ललगुटुवा, कटहल मोड़, डोरंडा के 56 सेट व अन्य जगहों पर वितरण पाइपलाइन भी बिछाया जाना था. बावजूद इसके ललगुटुवा में अब तक राइजिंग मेन और स्टोरेज की सुविधा अब तक बहाल नहीं की जा सकी. झारखंड हाईकोर्ट में भी रांची शहरी जलापूर्ति योजना को लेकर एक याचिका अब तक लंबित है. इसमें कहा गया था कि भूमि विवाद की वजह से योजना पूरी नहीं हो पा रही है. एलएनटी ने भी हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे को लेकर काम धीमा कर दिया था.

योजना में अब तक तीन अभियंता प्रमुख और कई अभियंता भी बदल गये

रांची शहरी जलापूर्ति योजना फेज-1 का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है, पर पेयजल और स्वच्छता विभाग के तीन अभियंता प्रमुख, इतने ही अधीक्षण अभियंता (नागरिक अंचल) और आधा दर्जन से अधिक कार्यपालक अभियंता बदल गये. तत्कालीन अभियंता प्रमुख शारदेंदू नारायण के समय योजना को रफ्तार मिली थी. इसके बाद हीरा लाल प्रसाद, रमेश कुमार, तनवीर अख्तर और अब उस समय के अधीक्षण अभियंता श्वेताभ कुमार अभियंता प्रमुख के पद पर हैं. अब योजना की रिर्पोर्टिंग विभाग के सुवर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल से की जा रही है. पहले गोंदा, हटिया और शीर्ष कार्य प्रमंडल की तरफ से अलग-अलग रिपोर्टिंग की जा रही थी.

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