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रविंद्र नाथ टैगोर: एक ऐसा व्यक्तित्व है जो मरकर भी अमर है…

by bnnbharat.com
May 7, 2020
in समाचार
रविंद्र नाथ टैगोर: एक ऐसा व्यक्तित्व है जो मरकर भी अमर है…

रविंद्र नाथ टैगोर: एक ऐसा व्यक्तित्व है जो मरकर भी अमर है...

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नीता शेखर,

रविंद्र नाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे शब्दों में बयां करना बहुत ही कठिन है. रवीना टैगोर जिनके बारे में कुछ भी लिखना यह बताने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे ,वो ऐसे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे जिनके संपूर्ण जीवन से एक प्रेरणा या सीख ली जा सकती है.

रविंद्र जयंती वार्षिक मनाया जाने वाला सांस्कृतिक त्योहार है जो बंग समुदाय द्वारा दुनिया भर में मनाया जाता है. यह मई के महीने में मनाया जाता है जोकी बांग्ला कैलेंडर के अनुसार रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म वैशाख महीने के 25 वें दिन 1861 में हुआ था.

उनके जन्म दिवस के अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कवि वर्णन, गीत, रविंद्र संगीत ,कविताएं, नृत्य नाटिका, रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखित कविताएं विभिन्न स्कूलों में आयोजित की जाती है. मुख्य रूप से टैगोर की जयंती बंगाल के शांति निकेतन बीरभूम जिला में “विश्व भारती विश्वविद्यालय” में मनाया जाता है, जिसकी स्थापना स्वयं रविंद्र नाथ टैगोर ने की थी.

रविंद्र नाथ टैगोर को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है! उनकी रचनाओं में से 2 देशों के राष्ट्रगान लिए गए हैं भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन और बांग्लादेश का राष्ट्रगान “आमार सोनार बांग्ला”! पश्चिम बंगाल में1901 में टैगोर ने ग्रामीण पश्चिम बंगाल में एक प्रायोगिक विद्यालय की स्थापना की शांति निकेतन (शांति का निवास) जहां उन्होंने भारतीय और पश्चिमी परंपराओं में सर्वश्रेष्ठ मिश्रण करने की मांग की. वहीं स्कूल में स्थाई रूप से बस गए जो, 1921 में विश्व भारती विश्वविद्यालय बन गया. 1902 और 1907 के बीच उनकी पत्नी और दो बच्चों की मृत्यु हो गई. तब उन्होंने उस घटना से उत्पन्न दुख को “गीतांजलि” गीत प्रस्ताव की रचना की. इस रचना के उपलक्ष्य में 1913 में उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया.

1912 से टैगोर ने भारत से बाहर लंबी अवधि बिताई. यूरोप, अमेरिका और पूर्वी एशिया में अपने काम से व्याख्यान और पाठ किया और भारतीय आजादी के कारणों के एक विशेष प्रवक्ता बन गये. इतना ही नहीं उन्होंने 60 के दशक में पेंटिंग का भी निर्माण किया और ऐसे काम किए जिसमें उन्हें भारत के अन्य समकालीन कलाकारों में स्थान दिलाया.

रविंद्र टैगोर पहचान के मोहताज नहीं है आज उनका गीत संगीत हर बंगाली के यहां मिल जाएगा. आज भी बंगाली उनकी रचनाओं को सुनते हैं. हर घर में रविंद्र संगीत गाया जाता है उनकी कही हुई कुछ बातें आपके जीवन पर प्रभाव भी डालती है जैसे-

1. आस्था के पक्षी है जो सुबह अंधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है.
2. जो कुछ हमारा है वह हम तक आता है यदि हम उससे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं.
3. हर एक घटनाएं जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं एक रात भूत बनकर आपकी नींद में बाधा डालने की कोशिश करते हैं. 4. खुश रहना बहुत सरल है और सरल होना बहुत मुश्किल है.
5. जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता उसी को क्रोध अधिक आता है.
6. किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिए क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है. समय परिवर्तन का रूप है परंतु घड़ी उसे केवल परिवर्तन के रूप में दिखाती है धन के रूप में नहीं.

रविंद्र नाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपने प्रकाश से सर्वत्र रौशनी फैलाई. भारत के बहुमूल्य रतन में से एक ही हीरा का तेज चारों दिशा में फैला जिससे भारतीय संस्कृति का अद्भुत साहित्य, गीत, कथाएं, उपन्यास लेख प्राप्त हुए. ऐसे व्यक्ति का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुआ.

रविंद्र नाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व है जो मरकर भी अमर है ऐसे व्यक्ति को शत-शत नमन और श्रद्धांजलि.

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