BnnBharat | bnnbharat.com |
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य
No Result
View All Result
BnnBharat | bnnbharat.com |
No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

चिंतन: ‘दिव्यांग महिला’, बहुत फर्क है उनमें और हम सबमें

by bnnbharat.com
December 3, 2019
in समाचार
चिंतन: ‘दिव्यांग महिला’, बहुत फर्क है उनमें और हम सबमें

चिंतन: 'दिव्यांग महिला', बहुत फर्क है उनमें और हम सबमें

Share on FacebookShare on Twitter

राहुल मेहता,

रांची: हैदराबाद व रांची की घटना नई नहीं है. पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं के समक्ष अनेक चुनौतियां रही हैं. दिव्यांगता इन चुनौतियों को बहुगनी बना देती है. दिव्यांग महिलायें आज सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक रूप से हाशिये पर हैं. उचित स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यवसाय, अधिकार, सुरक्षा तक उनकी पहुंच अति सीमित है.

हैदराबाद मामले में देष में आक्रोश है. हर मामला ना तो इतना जघन्य होता है ना जनता इतना मुखर होती है. फिर भी महिला मुद्दे को स्वर प्रदान करने वाली संस्थायें भी दिव्यांग महिलाओं के मुद्दे को स्वर प्रदान करने का सीमित न्यूनतम प्रयास भी नहीं करती.

एक प्रतिवेदन के अनुसार विगत 03 सालों में लैंगिक हिंसा के मामले लगभग डेढ़ गुणा बढ़े हैं. दिव्यांगजनों के साथ यह वृद्धि दो गुणा से भी ज्यादा है. इसका एक कारण है रिर्पोटिंग में वृद्धि, जो एक अच्छा संकेत है. परंतु चिंता की वजह दूसरा कारण है.

दिव्यांगजनों के साथ लैंगिक हिंसा के 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में विभिन्न कारणों से न्याय नहीं मिल पाता. दिव्यांगजनों का गवाही में कठिनाई इसका एक प्रमुख कारण है. इस समस्या के निदान के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं, परंतु वे धरातल में नहीं उतर पा रहें हैं. सरकार के साथ-साथ जनता की मानसिकता भी इसके लिए जिम्मेदार है.

भारतीय रेल की विश्व भर में अपनी एक पहचान है. यह अलग बात है कि अलग-अलग कारणों से कभी-कभार बदनामी भी हो जाती है, परन्तु सरकार सुधार के लिये प्रयासरत है.

आज भी सरकार, समुदाय एवं यात्री स्टेशनों में किसी व्यक्ति से कोई सरोकार नहीं रखते तो वह है- ”मानसिक और बौद्धिक दिव्यांग महिला.’’ भारत के किसी भी स्टेशन पर चले जायें छोटी या बड़ी, वहां ऐसी दिव्यांग महिला बेघर-बेसहारा मिल जायेगी. यदि आपका वास्ता उस स्टेशन से बार-बार पड़ता है तो आप उस दिव्यांग महिला को अक्सर गर्भवती ही पायेंगे. कभी बच्चे के साथ तो कभी बिना बच्चे के.

अगर वह किसी यात्री के पास से गुजरती है तो यात्रीगण ऐसे दुत्कारते हैं जैसे वह अपनी सारी गंदगी उन्हें ही दे देगी. अगर कुछ देना हुआ तो बचा-खुचा खाना फेंक कर दे देतें हैं, लेकिन कभी उसे इस परिस्थिति से निकालने का प्रयास नहीं करते. परन्तु हमारे समाज में से ही कुछ लोग उसका उपभोग करते रहते हैं.

वह हवस का शिकार बनती रहती है. हम उसे दिव्यांग एवं अक्षम कहते हैं तो वह अपनी सीमाओं के बावजूद अपने बच्चों को समाज के दरिन्दों से बचाने का प्रयास करती नजर आती है. बहुत फर्क है उनमें और हम सबमें, पर हर खामोशी की कीमत होती है, जिसे सबको चुकाना पड़ता है.

Share this:

  • Click to share on Facebook (Opens in new window)
  • Click to share on X (Opens in new window)

Like this:

Like Loading...

Related

Previous Post

प्रियंका गांधी की सुरक्षा में हुई है गंभीर चूक: रॉबर्ट वाड्रा, मोदी सरकार पर साधा निशाना

Next Post

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर किया उन्हें नमन

Next Post
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर किया उन्हें नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर किया उन्हें नमन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy
  • Admin
  • Advertise with Us
  • Contact Us

© 2025 BNNBHARAT

No Result
View All Result
  • समाचार
  • झारखंड
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • औषधि
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी करेंट अफेयर्स
  • स्वास्थ्य

© 2025 BNNBHARAT

%d